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तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 2122 212


तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा 

जो बुरा है वो भला हो जाएगा (1)

जो पुराना जख़्म माज़ी ने दिया
दो ही दिन में क्या नया हो जाएगा (2)

खाद पानी मिलने से ही क्या शजर
वक़्त से पहले बड़ा हो जाएगा (3)

है अलग सबसे ख़ज़ाना प्यार का
ख़र्च कीजै दोगुना हो जाएगा (4)

दोस्ती में दर्द-ओ-ग़म हो या ख़ुशी
जो भी तेरा है मेरा हो जाएगा (5)

क़द अगर छोटा है उसका दोस्तो
मैं झुका तो वो बड़ा हो जाएगा (6)

ये नहीं सोचा था मैंने ख़्वाब में
एक पत्थर देवता हो जाएगा (7)

दूर होने से बढ़ीं नज़दीकियाँ
पास होंगे फासला हो जाएगा (8)

*मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सालिक गणवीर on February 6, 2021 at 1:54pm

आदरणीय  अमीरुद्दीन 'अमीर' जी
आदाब

ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए कोटिशः धन्यवाद।

Comment by सालिक गणवीर on February 6, 2021 at 1:52pm

प्रिय भाई Krish mishra 'jaan' gorakhpuri  जी

सादर अभिवादन

ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए कोटिशः धन्यवाद।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on February 4, 2021 at 9:55pm

जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 4, 2021 at 8:12pm

तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा
जो बुरा है वो भला हो जाएगा? (1).........क्या बात है क्या खूब मतला है आदरणीय!

जो पुराना जख़्म माज़ी ने दिया
दो ही दिन में क्या नया हो जाएगा (2)....ये शे'र मानीखेज़ नहीं हुआ मेरी समझ में।

खाद पानी मिलने से ही क्या शजर
वक़्त से पहले बड़ा हो जाएगा (3 बहुत बेहतरीन,शानदार.

है अलग सबसे ख़ज़ाना प्यार का
ख़र्च कीजै दोगुना हो जाएगा .....वाह वाह जबरदस्त।

दोस्ती में दर्द-ओ-ग़म हो या ख़ुशी
जो भी तेरा है मेरा हो जाएगा (5) गज़ब,कमाल शे'र

क़द अगर छोटा है उसका दोस्तो
मैं झुका तो वो बड़ा हो जाएगा (6) वाह वाह बेहतरीन।

ये नहीं सोचा था मैंने ख़्वाब में
एक पत्थर देवता हो जाएगा (7)....ये अन्य शे'रों के अपेक्षा कमतर है।

दूर होने से बढ़ीं नज़दीकियाँ
पास होंगे फासला हो जाएगा (8) हासिले गजल शे'र।

आ. बड़े भैया सालिक गणवीर जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

Comment by सालिक गणवीर on February 4, 2021 at 7:13pm

आ. Chetan Prakash जी
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए कोटिशः धन्यवाद।

Comment by सालिक गणवीर on February 4, 2021 at 7:12pm

आ. भाई  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए कोटिशः धन्यवाद।

Comment by सालिक गणवीर on February 4, 2021 at 7:10pm

उस्ताद -ए - मुहतरम Samar kabeer  साहिब
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और सराहना के लिए कोटिशः धन्यवाद। आपकी इस्लाह से ग़ज़ल में चार चाँद लग गए। सलामत रहें।

Comment by Samar kabeer on January 31, 2021 at 2:53pm

जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

'जो बुरा है क्या भला हो जाएगा
तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा'

इस मतले को यूँ कहें:-

'तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा

जो बुरा है वो भला हो जाएगा' 

'ख़र्च कीजे फिर जमा हो जाएगा'

इस मिसरे में क़ाफ़िया दुरुस्त नहीं है,सहीह शब्द "जम'अ"21 है,देखियेगा ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 31, 2021 at 2:29pm

सातवें शेर के दूसरे मिसरे में है को हो कर लें । सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 31, 2021 at 2:22pm

आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

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