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2122 / 2122 / 2122 / 212

हो रही है  दिल पे खट-खट मौत की दस्तक  है क्या 

जा रहे वापस या उसके क़दमों की ठक-ठक है क्या

फिर उठा  है  हर तरफ़  ये इक धुआँ सा आज क्यों

आग जिससे घर जला था बढ़ गई दिल तक है क्या

भूल   बैठा   है  मुझे   तू   सुन  के  या   अन्जान  है

मेरी आहों  की  रसाई  आज  भी  तुझ  तक  है क्या

गुम हुआ  हूँ जबसे  मैं  उसके  ख़याल-ओ-ख़्वाब में

बोलता हूँ जब भी कुछ ये सुनता हूंँ बक-बक है क्या

गर  गिला  मुझसे  है  कोई  कहने  में  क्या  बात  है 

मैं  तेरा अपना  हूँ भाई  इसमें  भी कुछ  शक है क्या 

जाने-जाँ  मिलने  को  तुझ  से  कब  से  मैं  बेताब हूँ 

दिल  में  ये  मेरी तरह  ही  तेरे भी धक-धक  है  क्या 

हो  रहा  है  शोर  बरपा  हर  तरफ़  ये  क्या  'अमीर' 

उठ के  तूफ़ाँ  से लहर भी  आ गई  घर तक  है क्या 

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 28, 2020 at 8:02pm

जनाब रूपम कुमार जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये आपका तहे-दिल से शुक्रिया। । सादर।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 26, 2020 at 5:14pm

मुहतरम जनाब आशीष यादव जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिये दिल की गहराईयों से शुक्रिया।  सादर।

Comment by आशीष यादव on August 26, 2020 at 12:16am

Very good अशआरों से सजी उम्दा ग़ज़ल पर congratulations.

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 21, 2020 at 10:28pm

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी मुबारक आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से शुक्रिया। सादर।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 21, 2020 at 10:26pm

मुहतरमा डिम्पल शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और सुख़न नवाज़ी का तहे-दिल से शुक्रिया। सादर।

Comment by Samar kabeer on August 21, 2020 at 3:53pm

जनाब अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Dimple Sharma on August 21, 2020 at 10:50am

आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'साहब आदाब, वाह बहुत ख़ूब, हर शेर कमाल , खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 5, 2020 at 3:30pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से शुक्रिया।  सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 5, 2020 at 4:06am

आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 4, 2020 at 10:22pm

जनाब बृजेश कुमार 'बृज' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से शुक्रिया। सादर।

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