For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नग़्मा (आप यूँ ही अगर हमसे रूठे रहे)

आप यूँ ही अगर हमसे रूठे रहे 

एक आशिक़ जहाँ से गुज़र जाएगा 

ऐसी बातें करोगे अगर आप तो

ग़म का मारा ये दिल कुछ भी कर जाएगा

आप यूँ ही अगर... 

कैसी नाराज़गी है ओ जान-ए-वफ़ा

मुझसे क्या हो गई भूल कुछ तो बता 

हाय कुछ तो बता 

आप ख़ुद ही समझ लेंगे इक रोज़ ये

जब ख़ुमार आपका ये उतर जाएगा

आप यूँ ही अगर...

तेरे वादों पे हम कर यक़ीं लुट गए

तेरी भोली सी सूरत पे क्यूँ मिट गए

हाय क्यूँ मिट गए

मर मिटोगे जो हर भोली सूरत पे यूँ 

हुस्न वादों से अपने मुकर जाएगा

आप यूँ ही अगर... 

बस तुम्हारे ही बन के रहेंगे सदा

फिर कभी तुमसे हम अब न होंगे जुदा 

अब न होंगे जुदा 

ये अदा है तुम्हारी या इक़रार है 

वक़्त इसका भी इज़हार कर जाएगा

आप यूँ ही अगर हमसे रूठे रहे 

एक आशिक़ जहाँ से गुज़र जाएगा 

"मौलिक व अप्रकाशित"

-------------------------------------------------------------------- 

मशहूर नग़्मा... आप यूँ ही अगर हमसे मिलते रहे 

                      देखिये एक दिन प्यार हो जाएगा 

की ज़मीन में नग़्मे की एक सईद कोशिश। 

Views: 108

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 30, 2020 at 8:53pm

आदरणीय सर्वश्री लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी, रवि भसीन शाहिद जी और सालिक गणवीर जी आदाब, आप सभी की ज़र्रा-नवाज़ी का दिल की गहराईयों से शुक्रगुजा़र हूँ। सादर। 

Comment by सालिक गणवीर on July 30, 2020 at 10:30am

आदरणीय अमीरूद्दीन 'अमीर'साहिब
आदाब

खूबसूरत नग्मा हम तक पँहुचाने के लिए आपका हार्दिक आभार और आपको तह-ए-दिल से

दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ, आदरणीय.

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on July 30, 2020 at 9:52am

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, आपको इस ख़ूबसूरत नग़मे की रचना पर हार्दिक बधाई। दरअस्ल मैं आपकी पोस्ट पर आया तो था, लेकिन मैंने ये गीत सुना नहीं हुआ था, सो ये सोचा की गीत सुनकर ही टिप्पणी लिखनी चाहिए। राग केदार में बहुत मधुर धुन बनाई ओ पी नय्यर साहिब ने। सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 30, 2020 at 5:07am

आ. भाई अमीरुद्दीन जी सादर अभिवादन । इस सन्नाटे से होकर मैं गुजरा तो था पर निशान न जाने कहाँ गायब हो गये ...बहरहाल पुनः इस खूबसूरत नग्मे के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकारें ।..

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 29, 2020 at 10:35pm

 इतना सन्नाटा क्यूँ है भाई ?!!! 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"जरा याद उन्हें भी कर लो ================= जश्न मनाएँ आज़ादी कायाद मगर बलिदान करें |आज शहीदों का भी…"
58 minutes ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल..डरावनी सी रात थी बड़ा अजीब ख्वाब था-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय धामी जी ग़ज़ल पे आपकी उपस्थित उत्साहबर्धक है...हार्दिक आभार आपका"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ. भाई सतविन्द्र जी, सादर अभिवादन । प्रदत्त विषय पर अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ. भाई बासुदेव जी, सादर अभिवादन । दोहों की सराहना के लिए आभार।"
5 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post बड़ा दिन हो मुबारक
"आदरणीया Rachna Bhatia साहिबा, नज़्म में आपकी शिरकत और सुख़न-नवाज़ी के लिए तह-ए-दिल से आपका…"
6 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तो
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब, नमस्कार। हिन्दी की ख़ुशबू से महकती इस सुंदर ग़ज़ल…"
7 hours ago
Rachna Bhatia commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post बड़ा दिन हो मुबारक
"आदरणीय रवि भसीन'शाहिद' जी बेहतरीन नज़्म लिखी। बधाई स्वीकार करें।"
8 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"कुछ गुम कुछ आगे दिखते थे, उनको याद करें शोणित से इतिहास रचे थे, उनको याद करें। स्वयं पेट को पट्टी…"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

आज़ादी के पुनीत पर्व पर वीर रस की कविता

आज पुनः जब मना रहे हम, वर्षगाँठ आज़ादी कीआओ थोड़ी चर्चा करलें, जनगण मन आबादी कीजिन पर कविता गीत लिखूँ…See More
11 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तो

बह्र-ए-मीर पतझर में भी गीत बसंती गाऊँ तो जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तोअंदर का अँधियारा क्या छट…See More
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ. भाई बासुदेव जी, सादर अभिवादन । प्रदत्तविषय पर सुन्दर गीत रचा है । हार्दिक बधाई ।"
13 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ0 लक्ष्मण धामी जी बहुत सुंदर दोहे। बधाई। आजादी का पर्व है, घर घर मंगल गान।उड़े तिरंगा शान से, देश…"
13 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service