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अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2122   2122  2122   212

.

अपनी धुन में सब मगन हैं किससे क्या चर्चा करें.
किसको अपना दिल दिखायें किसके ग़म पूछा करें.

अब हमारी धडकनों का मोल कुछ लग जाये बस,
चल चलें मालिक के दर पर और कोई सौदा करें.

ज़िन्दगी इस खूबसूरत जाल में लिपटी रही,
रात में लिक्खें ग़ज़ल दिन में तुझे सोचा करें.

दे सके तो दे हमें वो वक़्त फिर मेरे ख़ुदा,
रात भर जागा करें और खत उन्हें लिक्खा करें.

सारा जीवन एक उलझन के भँवर में फँस गया,
अपने रिश्तों की ख़ुशी को क्या करें क्या ना करें.

रूठ जाने के लिए उनके बहाने बेशुमार,
हम मनाने के लिए उनसे शिकायत क्या करें.

आप तो फिर आप है और आप सा कोई कहाँ,
आपको ढूंढें कहाँ किसका बता सजदा करें.

जिसमें तेरे ग़म की खुश्बू हो जहां की पीड़ भी,
कौन से अहसास से हम वो सुखन पैदा करें.

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by मनोज अहसास on August 6, 2020 at 12:11am

आदरणीय एवम आदरणीया साथियों का हार्दिक आभार

सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 4, 2020 at 9:31pm

बढ़िया ग़ज़ल ज़नाब मनोज जी।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 30, 2020 at 9:50pm

जनाब मनोज कुमार अह्सास जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। 

Comment by Dimple Sharma on July 30, 2020 at 8:27am

आदरणीय मनोज अहसास जी नमस्ते, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 30, 2020 at 5:11am

आ. भाई मनोज अहसास जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

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