For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

'राहगुज़र : दिव्यालोक' [कुछ हाइकु: भाग-3]

1-
आलोक पर्व
सेतु ये जन-हेतु
प्रकाश-स्तंभ


2-
राहगुज़र
अंधेरे का निस्तार
प्रकाश-पर्व


3-
अपनापन
दीप से विस्तारित
आत्मकेंद्रित

4-
रूप चौदस
सौंदर्य प्रसाधन
आध्यात्मिकता

5-
दूज सुबोध
भ्रातृ-भगिनि योग
दिव्य-आलोक


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 135

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 8, 2018 at 1:03am

मेरी इन हाइकु रचनाओं पर भी समय देकर अनुमोदन और प्रोत्साहन हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह साहिब।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 7, 2018 at 9:29pm

आदरणीय उस्मानी साहब जीवंत हाइकु का सृजन, बहुत बहुत बधाई

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 7, 2018 at 8:43pm

मेरी इस रचना पर  भी  समय देकर अनुमोदन और प्रोत्साहन हेतु सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण धामी  'मुसाफ़िर'  साहिब।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 7, 2018 at 10:57am

आ. भाई शैख़ शहज़ाद जी,ये हाइकू भी अच्छे हुए। हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 6, 2018 at 4:13pm

मेरी इस रचना पटल पर उपस्थित होकर अनुमोदन और हौसला अफ़जाई हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय समर कबीर साहिब,  आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब और आदरणीया नीलम उपाध्याय साहिबा।

Comment by TEJ VEER SINGH on November 6, 2018 at 2:41pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी।बेहतरीन हाइकू।

Comment by Neelam Upadhyaya on November 6, 2018 at 12:56pm

 आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी,  बेहतरीन हाइकू की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई। 

Comment by Samar kabeer on November 6, 2018 at 12:11pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,ये हाइकू भी अच्छे हुए, बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'कागा उवाच' (लघुकथा) :
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
5 minutes ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'होंगी ही उससे…"
7 minutes ago
Hariom Shrivastava posted blog posts
21 minutes ago
vishva prakash mehra is now a member of Open Books Online
2 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
15 hours ago
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

   चल छुपे जो तेरे थे राज़ नुमायाँ कर दें।दर्द अपने को पराये या के दरमाँ कर दें।जिंदगी उम्र बताई न…See More
18 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र
"आदरणीय बाऊजी बहुत बहुत आभार"
23 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र
"आदरणीय बृजेश जी बहुत बहुत आभार"
23 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई ..
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,इस प्रयास के लिए बधाई ।"
yesterday
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'रहबरी तीरगी की रहे…"
yesterday
SALIM RAZA REWA posted photos
yesterday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Saturday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service