For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नई पसंद का जमाना ... (110 वीं रचना )

नई पसंद का जमाना ... (110 वीं रचना )

राम राम भाई
आज दुकान खोलने में बड़ी देर लगाई
हमने भी पड़ोसी को राम राम कहा
और अपनी नासाज़ तबियत का हवाला देते हुए
अपनी दुकान का शटर उठाया
धूप अगरबत्ति जलाकर
उसके धुऐं को दुकान और गल्ले में घुमाया
प्रभु को शीश नवाकर
अच्छी बोहनी के लिए प्रार्थना करके
धूपदानी प्रभु के आगे रखी ही थी कि
एक ग्राहक ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई
हमने चौंक कर
अपनी सुराहीदार गर्दन को
भगवान बने ग्राहक की तरफ घुमाया
एक अधेड़ लेकिन स्वस्थ व्यक्ति ने पूछा
क्यों जी, क्या आप गीत बेचते हैं
हमने गर्दन को सीधा किया,
कालर पर अपनी पतली उंगलियाँ घुमाई
और शिष्टाचार के गिलास में
मुस्कुराहट का शरबत पेश करते हुए कहा
जी हाँ, सौ प्रतिशत
हम नये पुराने,दर्दीले सुहाने
हर मौसम के गीत बेचते हैं
कहिये ! कौन सा पेश करुँ
अच्छा ! ग्राहक ने कहा
वो जो ऊपर ही ऊपर
लाल कपड़े में लिपटा है
कौन से गीत का पुलिंदा है
अरे अरे आपकी तो बड़ी पारखी नजर है
ये वो गीत हैं जिनकी मांग
हर राष्ट्रीय दिवस में होती है
इनमें आजादी के शहीद
सुभाष,भगत सिंह,गांधी,नेहरू,सरदार पटेल
जैसे अनेक शहीदों की कुर्बानियां
नये युग को देश भक्ति का संदेश दे रही हैं
न न, ये नहीं
ग्राहक ने कहा
तो फिर ये देखिये
ये रोमांटिक गीत हैं
और ये घर से आने के गीत हैं
ये दुकान से जाने के गीत हैं
ये प्रेमिका से रूठने के
और ये प्रेमिका को मनाने के गीत हैं
रुकिए रुकिए
इन गीतों के पुलिंदों को
जरा धीरे से हाथ लगाना
ये औलाद के लिए तड़पती
किसी माँ के आंसुओं में भीगे गीत हैं
उस ग्राहक ने
वो गीत ले कर अपने
सीने से लगा लिए
और चश्मे के भीतर
बहते आँसू छुपा लिए
हम भी थोड़े से संजीदा हो गये
खैर छोडिये
हमने अपनी दुकानदारी फिर चलाई
ये आज के जमाने की गीत हैं
देखने में क्या हर्ज है
राज की बात है सर
इस से कम कपड़ों के गीत
आपको कहीं नहीं मिलेंगे
और मजे की बात सर
सबसे ज्यादा बिक्री
इन्हीं की होती है
कहिये तो एक पीस ये रख दूं
अरे नहीं नहीं
बाल बच्चे दर आदमी हूँ
ऐसे गीतों से मैं
अपने बच्चों के संस्कारों की बलि
नए ज़माने की संस्कृति पर नहीं चढ़ाऊंगा
ठीक है साहब
जैसी आपकी मर्जी
बुरा न माने
हमें तो पेट की खातिर
सब कुछ रखना पड़ता है
अब देखिये
इन भजनों के गीतों के
पुलिंदों को झाड़ने का भी
समय नहीं मिलता
क्योंकि कोई इसे ख़रीदता ही नहीं
फर्ज,ईमान,और देशभक्ति के गीत
किसी कोने में
अपनी बेबसी पर रोते हैं
झूठी क़समों और वादों के गीतों की
आज तूती बोलती है
आज रेप गीतों का
भविष्य उज्ज्वल है
साहिब ! हमारी दो वक्त की रोटी
ऐसे ही गीतों की बदौलत है
सच मानिये सर
जमाने के साथ चलने में ही
आपकी भलाई है
वरना इस अंधी दौड़ में
आपके संस्कार, आपके उपदेश,
सब दौड़ते कदमो के नीचे कुचले जायेंगे
किसी पुराने कागज के टुकडों की तरह
हवा में बिखर जायेंगे
हमारी फटी कमीज और टूटी चप्पल
इसी शराफत का आईना है
ये हमारी और आपकी पसंद का नहीं
श्रीमान ! ये नई पसंद का जमाना है

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 502

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on December 18, 2015 at 8:43pm

आदरणीय डॉ गोपाल नरायन श्रीवास्तव जी प्रस्तुति पर आपके स्नेहात्मक आशीर्वाद का हार्दिक आभार। 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 17, 2015 at 7:26pm

सरना जी -बहुत बढ़िया रचना है -आपने हकीकत को एक नए  अदाज में बयां किया है . मेरी और से बधाई .

Comment by Sushil Sarna on December 16, 2015 at 12:34pm

आदरणीय  समर कबीर साहिब प्रस्तुति पर आपकी ज़र्रानवाज़ी का तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by Samar kabeer on December 15, 2015 at 10:33pm
जनाब सुशील सरना जी,आदाब,सबसे पहले तो आपकी 110 वीं रचना के लिये आपको बधाई पेश करता हूँ,इस कविता में अच्छी मंज़र कशी की है आपने,ढेरों दाद के साथ बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
yesterday
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
May 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service