For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

1 . नटखट नज़र .../2 . भीगी सौगातें ...

1 . नटखट नज़र ...

हो जाती बरसात तो गज़ब  होता
फिर वो भीगी हया का क्या होता
वो उड़ती चुनर पे नटखट  नज़र
भटक जाती अगर तो क्या  होता

2 . भीगी सौगातें ..

.

सावन की रातें हैं सावन की बातें है 

सावन में भीगी सी चंद मुलाकातें है
इक दूजे में सिमटे वो भीगे से  लम्हे
साँसों की साँसों को भीगी सौगातें हैं

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 47

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on Tuesday

आदरणीय नरेंद्र सिंह जी सृजन को अपनी मधुर प्रतिक्रिया से अलंकृत करने का हार्दिक आभार। कुछ अपरिहार्य कारणों से प्रत्युत्तर में विलम्ब के लिए क्षमा चाहूंगा। 

Comment by narendrasinh chauhan on June 16, 2017 at 4:29pm

सुन्दर रचना 

Comment by Sushil Sarna on June 15, 2017 at 7:11pm

आदरणीय मो. आरिफ साहिब सृजन के भावों को अपनी आत्मीय प्रशंसा से पल्ल्वित करने का हार्दिक आभार। 

Comment by Mohammed Arif on June 14, 2017 at 10:27pm
आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन बारिश का अहसास कराते मुक्तक । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rakshita Singh is now a member of Open Books Online
22 minutes ago
Sushil Sarna posted a blog post

ज़िंदगी के सफे ...

ज़िंदगी के सफे ...हैरां हूँ बाद मेरे फना होने के किसी ने मेरी लहद को गुलों से नवाज़ा है एक एक गुल में…See More
26 minutes ago
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post मूक दर्शक (लघुकथा)
"Ddhanywad aadarniya Mohammed Arif ji .Eid ki shubhkamnayen aapko"
37 minutes ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना
"आदरणीय सौरभ सर बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है, हर शैर सवा अरब का प्रतिनिधित्व कर रहा है, भारत के परिवेश…"
41 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना
"वाह मुग्ध हूँ, आपकी ग़ज़ल पढ़कर, लाजबाब से भी लाजबाब, बहुत बहुत बधाई आपको. ईद मुबारक "
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"बेहतरीन ग़ज़ल "
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल ---झुकी झुकी सी नज़र में देखा
"आ0 मित्र श्री जयनित मेहता जी सादर आभार ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post 52 शेर की ग़ज़ल।
"आ0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आभार ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post 52 शेर की ग़ज़ल।
"भाई जयनित मेहता जी आभार मित्र"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"आ0 अनिता मौर्या जी शुक्रिया ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"आ0 जयनित मेहता जी सादर आभार ।"
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पश्चिम का आँधी
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, आप बिलकुल सही हैं, यह १६ १० मात्रा पर ही है, फुर्र हुई चिट्ठी…"
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service