For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तुम्हारे इन्तज़ार में ........

तुम्हारे  इन्तज़ार में ........

देखो न !
कितने सितारे भर लिए हैं मैंने
इन आँखों के क्षितिजहीन आसमान में
तुम्हारे इन्तज़ार में ।

गिनती रहती हूँ इनको
बार- बार सौ बार
तुम्हारे इन्तज़ार में ।

तुम क्या जानो
घड़ी की नुकीली सुइयाँ
कितना दर्द देती हैं ।
सुइयों की बेपरवाह चाल
हर  उम्मीद को
बेरहमी से कुचल देती है।
अन्तस का ज्वार
तोड़ देता है
घुटन की हर प्राचीर को
और बहते- बहते ठहर जाता है
खारी बूँद की शक्ल में
ठोड़ी पर
तुम्हारे इन्तज़ार में।

देखो!
विलम्ब न करो।
छोड़ न दें साँसें
कहीं काया कुटीर को
तुम्हारे इन्तज़ार में।

सुशील सरना / 20-9-21
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 75

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on October 3, 2021 at 4:29pm
आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर
Comment by Sushil Sarna on October 3, 2021 at 4:29pm
आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन के भावों को आत्मीय मान से सम्मानित करने का दिल से आभार आदरणीय
Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on September 23, 2021 at 7:44pm

छोड़ न दें साँसें
कहीं काया कुटीर को
तुम्हारे इन्तज़ार में।  वाह! क्या शब्दावली है, लाजवाब।

आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, एक और शानदार कृति के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें। सादर। 

Comment by Samar kabeer on September 22, 2021 at 3:25pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - इक अधूरी 'आरज़ू' को उम्र भर रहने दिया

वज़्न -2122 2122 2122 212ख़ुद को उनकी बेरुख़ी से बे- ख़बर रहने दिया उम्र भर दिल में उन्हीं का…See More
5 hours ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - मिश्कात अपने दिल को बनाने चली हूँ मैं
"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ,ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफ़जाई करने के लिए तहे दिल से…"
6 hours ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल -सूनी सूनी चश्म की फिर सीपियाँ रह जाएँगी
"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ,ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफ़जाई करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया"
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

वादे पर चन्द दोहे .......

मीठे वादे दे रही, जनता को सरकार । गली-गली में हो रहा, वादों का व्यापार ।1।जीवन भर नेता करे, बस…See More
8 hours ago
Deependra Kumar Singh updated their profile
22 hours ago
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"//चर्चा समाप्त// जनाब सौरभ पाण्डेय जी, क्या ये आदेश है?  मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि आप कैसी…"
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"लिखने और केवल लिखने मात्र को परिचर्चा का अंग नहीं कह सकते. पढ़ना और पढ़े को गुनना भी उतना ही जरूरी…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, आदरणीय निलेश जी की टिप्पणी ग़ज़ल पर आई थी, जिस पर मेरी प्रतिक्रिया…"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जी आदरणीय ब्रज जी बस कोशिश जारी है आपका आभार ग़ज़ल तक आने के लिये ऐसा लगता है की शायद दोषरहित ग़ज़ल…"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जी आदरणीय अमीर जी सहृदय शुक्रिया ग़ज़ल तक आने के लिये आपका दिल से आभार"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
" सहृदय शुक्रिया आ नूर जी आपकी ग़ज़ल मुझे बहुत पसंद आती है ग़ज़ल तक आने के लिये शुक्रिया मैं इस…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से…"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service