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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – August 2018 Archive (3)

कोई देकर गया था इक खुशी यारो - गजल (लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" )

१२२२/१२२२/१२२२

मुहब्बत भी कहानी हो गयी हमसे

बहुत बद ये जवानी हो गयी हमसे।१।



कोई देकर गया था इक खुशी यारो

कहीं गुम वो निशानी हो गयी हमसे।२।



जमाना सारा ही  दुश्मन हुआ है यूँ

जरा सी सच बयानी हो गयी हमसे।३।



कसक सी दिल में उठ्ठी है कहीं यारो

किसी से बद जबानी हो गयी हमसे।४।



भला यूँ कम कहाँ हम थे मगर अब तो

ये दुनिया  भी  सयानी  हो …

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 27, 2018 at 9:55am — 10 Comments

अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)

२२ २२ २२ २



पूछ न इस  रुत कैसा हूँ

अबतक तो बस तन्हा हूँ।१।



बारिश तेरे  साथ गयी

दरिया होकर प्यासा हूँ।२।



आता जाता एक नहीं

मैं भी  कैसा  रस्ता हूँ।३।



जब तन्हाई डसती है

सारी रात भटकता हूँ।४।



हाथों में  चुभ  जाते हैं

काँटे जो भी चुनता हूँ।५।



जाने कौन चुनेगा अब

उतरन वाला कपड़ा हूँ।६।



तारों सँग कट जाती है

शरद अमावस रैना हूँ।७।



अनमोल भले बेकार…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 21, 2018 at 11:57am — 18 Comments

कुछ दोहे -लक्ष्मण धामी"मुसाफिर"

सुखिया को संसार में, सब कुछ मिलता मोल

पर दुखिया  के  वास्ते, सकल  जिन्दगी झोल।१।

हर देहरी  पर  चाह  ले, आँगन बैठे लोग

भूखों को दुत्कार नित, मंदिर मंदिर भोग।२।



पाले  कैसी  लालसा, हर  मानव मजबूर

हुआ पड़ोसी पास अब, सगा सहोदर दूर।३।



बिकने को कोई बिके, पर ये दुख का योग

औने-पौने  बिक  रहे, ऊँचे  कद  के  लोग।४।



घुट्टी में सँस्कार की, अब क्या क्या खास

रिश्तों से आने लगी, अब जो खट्टी बास।५।

मौलिक व…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 19, 2018 at 5:28pm — 12 Comments

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