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कोई देकर गया था इक खुशी यारो - गजल (लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" )

१२२२/१२२२/१२२२

मुहब्बत भी कहानी हो गयी हमसे
बहुत बद ये जवानी हो गयी हमसे।१।


कोई देकर गया था इक खुशी यारो
कहीं गुम वो निशानी हो गयी हमसे।२।


जमाना सारा ही  दुश्मन हुआ है यूँ
जरा सी सच बयानी हो गयी हमसे।३।


कसक सी दिल में उठ्ठी है कहीं यारो
किसी से बद जबानी हो गयी हमसे।४।


भला यूँ कम कहाँ हम थे मगर अब तो
ये दुनिया  भी  सयानी  हो  गयी हमसे।५।


मौलिक-अप्रकाशित

लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

Views: 647

Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 29, 2018 at 7:25pm

आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।

Comment by Ravi Shukla on August 29, 2018 at 4:53pm

आदरणीय लक्ष्मण जी अच्छी ग़ज़ल कही आपने उसके लिए मुबारकबाद कुबूल करें

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 28, 2018 at 8:00pm

आ. भाई नवीन जी, स्नेह के लिए आभार ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on August 28, 2018 at 6:47pm

आ0 मुसाफ़िर साहब तहेदिल से बधाई ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 28, 2018 at 2:28pm

आ. भाई तेजवीर जी, गजल की प्रशंसा कर उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 28, 2018 at 2:26pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और स्ने के लिए आभार ।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 28, 2018 at 2:08pm

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी। बेहतरीन गज़ल।

जमाना सारा ही  दुश्मन हुआ है यूँ 
जरा सी सच बयानी हो गयी हमसे।३।

Comment by Samar kabeer on August 28, 2018 at 12:04pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 27, 2018 at 7:12pm

आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति से उत्साहवर्धन के लिए आभार ।

Comment by vijay nikore on August 27, 2018 at 2:17pm

//जमाना सारा ही  दुश्मन हुआ है यूँ 
जरा सी सच बयानी हो गयी हमसे।३।//.....

वाह ! वाह !! बहुत ही खूबसूरत । हार्दिक बधाई, मित्र लक्ष्मण जी।

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