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Naveen Mani Tripathi's Blog (306)

ग़ज़ल -आग हम अंदर लिए हैं

2122 2122 2122 2122

वो किसी पाषाण युग के वास्ते अवसर लिए हैं ।

देखिये कुछ लोग अपने हाथ मे पत्थर लिए हैं ।।



है उन्हें दरकार लाशों की चुनावों में कहीं से ।

अम्न के क़ातिल नए अंदाज में ख़ंजर लिए हैं ।।



जो बड़े मासूम से दिखते ज़माने को यहां पर ।

हां वही नेता सुरक्षा में कई नौकर लिए हैं ।।



अब कहाँ इस दौर में जिंदा बची इंसानियत है ।

मुजरिमों को देखिये अब देह पर खद्दर लिए हैं।।



सुब्ह वो देते नसीहत भ्रष्टता से दूर रहिये ।

बेअदब होकर… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on November 23, 2017 at 12:00am — 4 Comments

ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है

1222 1222 122

तपन को आजमाना चाहता है ।

समंदर सूख जाना चाहता है ।।



तमन्ना वस्ल की लेकर फिजा में।

कोई मुमकिन बहाना चाहता है ।।



जमीं की तिश्नगी को देखकर अब ।

यहाँ बादल ठिकाना चाहता है ।।



तसव्वुर में तेरे मैंने लिखी थी।

ग़ज़ल जो गुनगुनाना चाहता है ।।



मेरी चाहत मिटा दे शौक से तू ।

तुझे सारा ज़माना चाहता है ।।



मेरी फ़ुरक़त पे है बेचैन सा वो ।

मुझे जो भूल जाना चाहता है ।।



चुभा देता है जो ख़ंजर खुशी से… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on November 21, 2017 at 11:00pm — 8 Comments

बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो

2122 2122 212

हो गई पूरी तमन्ना बस करो ।

बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो ।।



फिक्र किसको है यहां इंसान की ।

फिर कोई ताज़ा बहाना , बस करो ।।



होश में मिलते कहाँ मुद्दत से तुम।

इस तरह से दिल लगाना, बस करो ।।



बेवफा की हो चुकी खातिर बहुत ।।

राह में पलकें बिछाना, बस करो ।।



घर मे कंगाली का आलम देखिये ।

गैर पर सब कुछ लुटाना ,बस करो ।।



रंजिशों से कौन जीता इश्क़ में।हार कर अब तिलमिलाना, बस करो ।।





कर गई दीवानगी… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on November 10, 2017 at 5:11pm — 2 Comments

आप से क्या मुहब्बत हुई

आप से क्या मुहब्बत हुई ।

रात भी अब कयामत हुई ।।



जब भी आए तेरे दर पे हम ।।

दुश्मनों की इजाफ़त हुई ।।



हुस्न था आपका कुछ अलग ।

आप ही की हुकूमत हुई ।।



यूँ संवरते गए आप भी ।

हुस्न की जब इनायत हुई ।।



अब चले आइये बज्म में ।

आपकी अब जरूरत हुई ।।



जाइये रूठ कर मत कहीं ।

आपसे कब अदावत हुई ।।



है तकाजा यहां उम्र का ।

आईनों की हिदायत हुई ।।



कुछ अदाएं मचलने लगीं ।

आंख से जब हिमाकत हुई… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on November 10, 2017 at 12:26pm — 13 Comments

बेबस पे नज़र से वार न कर

22112 22112 22112 22112





ये इश्क़ कहीं बदनाम न हो इतना तू मेरा दीदार न कर ।

ऐ जाने वफ़ा ऐ जाने ज़िगर बेबस पे नज़र से वार न कर ।।



इन शोख अदाओं से न अभी इतरा के चलो लहरा के चलो।

यह उम्र बड़ी कमसिन है सनम

ख़ंजर पे अभी तू धार न कर ।।





हैं दफ़्न यहाँ पर राज़ कई इस कब्र पे लिक्खी बात तो पढ़ ।

अब वक्त गया अब उम्र ढली अब और नया इजहार न कर ।।



चेहरे की लकीरों को जो पढ़ा तो राज हुआ मालूम मुझे । दिल मांग गया तुझसे है कोई यह बात अभी इनकार न कर… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on November 7, 2017 at 12:53pm — 11 Comments

ग़ज़ल: अंगारो से प्रीत निभाया करता हूँ

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अंगारो से प्रीत निभाया करता हूँ ।

ख्वाब जलाकर रोज़ उजाला करता हूँ।।



एक झलक की ख्वाहिश लेकर मुद्दत से ।

मैं बादल में चांद निहारा करता हूँ ।।



एक लहर आती है सब बह जाता है ।

रेत पे जब जब महल बनाया करता हूँ ।।



शेर मेरे आबाद हुए एहसान तेरा ।

मैं ग़ज़लों में अक्स उतारा करता हूँ ।।





दर्द कहीं जाहिर न हो जाये मुझसे ।

हंस कर ग़म का राज छुपाया करता हूँ ।।



पूछ न मुझसे आज मुहब्बत की बातें ।

याद में…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on November 7, 2017 at 12:30pm — 13 Comments

याद आ जाती है फिर उलझी कहानी आपकी

2122 2122 2122 212

जब कभी भी देखता हूँ वो निशानी आपकी ।

याद आ जाती है फिर उलझी कहानी आपकी ।।



आज मुद्दत बाद ढूढा जब किताबों में बहुत ।

मिल गयी तस्वीर मुझको वह पुरानी आपकी।।



बेसबब इनकार कर देना मुहब्बत को मेरे ।

कर गई घायल मुझे वो सच बयानी आपकी ।।



याद है वह शेर मुझको जो लिखा था इश्क़ में ।।

फिर ग़ज़ल होती गई पूरी जवानी आपकी ।।



इक शरारत हो गई थी जब मेरे जज़्बात से ।

हो गईं आँखें हया से पानी पानी आपकी ।।



कुछ अना से कुछ… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on October 24, 2017 at 12:16am — 16 Comments

ग़ज़ल पास रह गया मेरे है , आपका कलाम भी

*212 1212 1212 1212*



आपकी ही रहमतों से मिल गई वो शाम भी ।

कुछ अदा छलक उठी है कुछ नज़र से जाम भी ।।

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ढूढ़िये न आप अब मेरे उसूल का चमन ।

दिल कभी जला यहां तो जल गया मुकाम भी ।।

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नज्र कर दिया गुलाब तो हुई नई ख़ता ।

हुस्न आपका बना गया उसे गुलाम भी ।

------------- -------- ------------------------------- ----

जब चिराग… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on October 14, 2017 at 11:01pm — 7 Comments

उसी का तसव्वुर पढ़ा जा रहा है

एक लंबी ग़ज़ल 30 शेर के साथ



122 122 122 122

अगर आप में कुछ सलीका बचा है ।

तो फिर आप से भी मेरी इल्तिजा है ।।



रकीबों की महफ़िल में क्या क्या हुआ है ।

सुना आपका ही तो जलवा रहा है ।।



यूँ रुख़ को पलट कर चले जाने वाले ।

बता दीजिए क्या मुहब्बत ख़ता है ।।



हया को खुदा की अमानत जो समझे ।

उन्हें ही सुनाई गई क्यों सजा है ।।



अगर दिल में आये तो रहना भी सीखो ।

मेरी तिश्नगी का यही मशबरा है ।।



मुख़ालिफ़ हुई ये हवाएं चमन… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on October 14, 2017 at 10:30pm — 17 Comments

ग़ज़ल

2122 1212 22

उस से मिलकर तुझे हुआ क्या है ।

पूछते लोग माजरा क्या है ।।



सच बताने पे आप क्यूँ रोये ।

आइने से हुई ख़ता क्या है ।।



है तबस्सुम का राज क्या उनके ।

आंख में गौर से पढा क्या है ।।



अश्क़ हैं बेहिसाब हिस्से में ।

ज़श्न के वास्ते बचा क्या है ।।



इस तरह रोकिये नहीं मुझको ।

पूछिये मत मेरा पता क्या है ।।



आप मतलब की बात करते हैं ।

आपके साथ फायदा क्या है ।।



छोड़िये बात आप भी उसकी ।

उसकी बातों में… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on October 11, 2017 at 9:00am — 13 Comments

वफ़ा के साथ यकीनन है वास्ता मेरा

1212 1122 1212 22

अलग है बात रखा नाम बेवफा मेरा ।।

वफ़ा के साथ यकीनन है वास्ता मेरा ।।



मेरे गुनाह का चर्चा है शह्र में काफी ।

तमाम लोग सुनाते हैं वाक्या मेरा ।।



नज़र नज़र से मिली और होश खो बैठा ।

उसे भी याद है उल्फत का हादसा मेरा ।।



वो आसुओं से भिगोते ही जा रहे दामन ।

पढा जो खत है अभी ,था वही लिखा मेरा ।



फ़िजा के पास रकीबों का हो गया पहरा ।

बढ़ा रही हैं हवाएं भी फ़ासला मेरा ।।



गरीब हूँ मैं शिकायत भी क्या करूँ उनकी… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on October 5, 2017 at 9:23am — 4 Comments

ग़ज़ल - मिलते कहाँ हैं लोग भी होशो हवास में

221 2121 1221 212



ठहरी मिली है ज़िंदगी उनके गिलास में ।

मिलते कहाँ हैं लोग भी होशो हवास में ।।



देकर तमाम टैक्स नदारद है नौकरी ।

अमला लगा रखा है उन्होंने विकास में ।।



सरकार सियासत में निकम्मी कही गई ।

रहते गरीब लोग बहुत भूँख प्यास में ।।



बेकारियों के दौर गुजरा हूँ इस कदर ।

घोड़ा ही ढूढता रहा ताउम्र घास में ।।



यूँ ही तमाम कर लगे हैं जिंदगी पे आज ।

रहना हुआ मुहाल है अपने निवास में ।।



कितने नकाब डाल के मिलने… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on October 4, 2017 at 5:06pm — 13 Comments

ग़ज़ल

221 2121 1221 212



ठहरी मिली है ज़िंदगी उनके गिलास में ।

मिलते कहाँ हैं लोग भी होशो हवास में ।।



देकर तमाम टैक्स नदारद है नौकरी ।

अमला लगा रखा है उन्होंने विकास में ।।



सरकार सियासत में निकम्मी कही गई ।

रहते गरीब लोग बहुत भूँख प्यास में ।।



बेकारियों के दौर गुजरा हूँ इस कदर ।

घोड़ा ही ढूढता रहा ताउम्र घास में ।।



यूँ ही तमाम कर लगे हैं जिंदगी पे आज ।

रहना हुआ मुहाल है अपने निवास में ।।



कितने नकाब डाल के मिलने… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on October 4, 2017 at 3:38pm — 3 Comments

ग़ज़ल -- कीचड़ के आस पास में देखा कवँल गया

*221 2121 1221 212*



सारा चमन गुलाब था अश्कों में ढल गया ।

था बारिशों का दौर समंदर मचल गया ।।



रुसवाईयां तमाम थीं दिल में मलाल थे ।

देखा जो हुस्न आपका पत्थर पिघल गया ।।



खुशबू बनी हुई है अभी तक दयार में ।

महबूब मेरा ख्वाब में आकर टहल गया ।।



कैसा नशा था इश्क़ में मदहोशियों के बीच ।

जो भी थे दफ़्न राज़ वो पल में उगल गया।।



जब मैं जला तो लोग बहुत जश्न में मिले ।

जैसे किसी नसीब का सिक्का उछल गया ।।



कहता था है ये आग… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 23, 2017 at 2:00am — 4 Comments

ग़ज़ल - बेसबब यूँ ही नही परदा करो

2122 2122 212

इस तरह बे फिक्र मत निकला करो ।

कुछ ज़माने को भी अब समझा करो।।



लोग पलकें हैं बिछाए राह में ।

बेसबब यूँ ही नहीं परदा करो ।।



है मुहब्बत से सभी की दुश्मनी।

ज़ालिमों से मत कभी उलझा करो ।।



फिर सितारे टूटकर गिरते मिले ।

आसमा पर भी नज़र रक्खा करो ।।



कुछ परिंदे हो गए बेख़ौफ़ हैं ।

कौन कैसा उड़ रहा देखा करो ।।



दाग दामन पर लगे कितने यहां ।

आइनो से भी कभी पूछा करो ।।



वक्तपर अक्सर मुकर जाते हैं लोग… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 22, 2017 at 8:38am — 1 Comment

ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे

2122 1122 22

चाँद बनकर वो निखर जाएंगे ।

शाम होते ही सँवर जाएंगे ।।



जख्म परदे में ही रखना अच्छा ।

देखकर लोग सिहर जाएंगे ।।



छेड़िये मत वो कहानी मेरी।

दर्द मेरे भी उभर जाएंगे ।।



घूर कर देख रहे हैं क्या अब।

आप नजरों से उतर जाएंगे।।



वक्त रुकता नहीं है दुनिया में ।

दिन हमारे भी सुधर जाएंगे ।।



क्या पता था कि जुदा होते ही ।

इस तरह आप बिखर जाएंगे ।।



ये मुहब्बत है इबादत मेरी ।

एक दिन दिल मे ठहर में… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 19, 2017 at 1:00pm — 14 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 122

रकीबों को उठाया जा रहा है ।

किसी पर जुल्म ढाया जा रहा है ।।



मैं छोड़आया तुम्हारी सल्तनत को।

मगर चर्चा चलाया जा रहा है ।।



मुखौटे में मिले हैं यार सारे ।

नया चेहरा दिखाया जा रहा है।।



सुखनवर की किसी गंगा में देखा ।

नया सिक्का चलाया जा रहा है ।।



सही क्या है गलत क्या है ग़ज़ल में ।

नया कुछ इल्म लाया जा रहा है ।।



अदब से वास्ता जिसका नहीं था ।

उसे आलिम बताया जा रहा है ।।



सिकेंगी रोटियां अब… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 13, 2017 at 5:30pm — 11 Comments

ग़ज़ल - जो मुद्दत से मुझे पहचानता है

1222 1222 122

मेरी पहचान को खारिज़ किया है ।

जो मुद्दत से मुझे पहचानता है ।।



खुशामद का हुनर बख्सा है रब ने ।

खुशामद से वो आगे बढ़ रहा है ।।



जतन कितना करोगे आप साहब ।

ये भ्रष्टाचार अब तक फल रहा है ।।



यकीं होता नही जिसको खुदा पर ।

वही इंसां खुदा से माँगता है ।।



उन्हें ही डस रहें हैं सांप अक्सर ।

जो सापों को घरों में पालता है ।।



गया मगरिब में देखो आज सूरज ।

पता वह चाँद का भी ढूढता है ।।



मदारी के लिए… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 12, 2017 at 1:58pm — 13 Comments

सियाह ज़ुल्फ़ के साये में शाम हो जाये

1212 1122 1212 22*

ये ख्वाहिशें हैं कि दिल तक मुकाम हो जाये ।

सियाह ज़ुल्फ़ के साये में शाम हो जाये ।।



हैं मुन्तज़िर सी ये आंखे कभी तू मिल तो सही।

नए रसूख़ पे मेरा कलाम हो जाये ।।





बड़े गुरुर से उसने उठाई है बोतल ।

ये मैकदा न कहीं फिर हराम हो जाये ।।



फिदा है आज तलक वो भी उस की सूरत पर ।

कहीं न वो भी सनम का गुलाम हो जाये ।।



अदा में तेज हुकूमत की ख्वाहिशें लेकर ।

खुदा करे कि वो दिल का निजाम हो जाए ।।





किसी… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 9, 2017 at 1:30am — 9 Comments

रहमतों से फ़ासला हो जाएगा

मत कहो हमसे जुदा हो जाएगा ।

वह मुहब्बत में फ़ना हो जाएगा ।।





इश्क के इस दौर में दिल आपका ।

एक दिन मेरा पता हो जाएगा ।।



धड़कनो के दरमियाँ है जिंदगी ।

धड़कनो का सिलसिला हो जाएगा ।।



इस तरह उसने निभाई है कसम ।

वह हमारा देवता हो जाएगा ।।



ऐ दिले नादां न कर मजबूर तू ।

वो मेरी ज़िद पर ख़फ़ा होजाएगा ।।



पत्थरो को फेंक कर तुम देख लो ।

आब का ये कद बड़ा हो जाएगा ।।



मत निकलिए इस तरह बे पैरहन ।

फिर चमन में हादसा… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 6, 2017 at 11:49pm — 8 Comments

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