For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल पास रह गया मेरे है , आपका कलाम भी

*212 1212 1212 1212*

आपकी ही रहमतों से मिल गई वो शाम भी ।
कुछ अदा छलक उठी है कुछ नज़र से जाम भी ।।
---------------------------------------------------------------
ढूढ़िये न आप अब मेरे उसूल का चमन ।
दिल कभी जला यहां तो जल गया मुकाम भी ।।
--------------------------------------------------------------------
नज्र कर दिया गुलाब तो हुई नई ख़ता ।
हुस्न आपका बना गया उसे गुलाम भी ।
------------- -------- ------------------------------- ----
जब चिराग जल गए तो फिर शलभ निकल पड़े ।
कुछ शमा के वास्ते हुए हैं कत्ले आम भी ।।
--------------------------------------------------------------------
मिल गयी नई किरन तो वक्त भी बदल गए ।
मुद्दतों के बाद कर गया कोई सलाम भी ।।
----------------------------------------------------------------------
पूछिये न इश्क में किसे मिला है क्या यहां ।
कुछ फकीर हो गए तो कुछ हुए निजाम भी ।।
-------------------------------------------------------------------------
खो दिया गुरूर जो अना हुई जुदा जहाँ ।
कर सका वही वहाँ खुदा का एहतराम भी ।।
----------------------------------------------------------------------
दो पलों की दूरियां हैं जिंदगी की मौत से ।
कर रहे वो मुद्दतों का खास इंतजाम भी ।।
--------------------------------–-----------------------------------
कुछ निशानियाँ भी छोड़ कर चले गए कहाँ ।
पास रह गया मेरे है आपका कलाम भी ।।

---नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

Views: 71

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Naveen Mani Tripathi on October 15, 2017 at 12:34pm
आ0 मो0 आरिफ साहब विशेष आभार । आपके नोट पर अवश्य प्रयास करूंगा ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on October 15, 2017 at 12:32pm
आ0 शेख सहज़ाद उष्मानी साहब तहे दिल से शुक्रिया ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on October 15, 2017 at 12:30pm
आ0 सालिम रजा रेवा साहब हार्दिक आभार
Comment by SALIM RAZA REWA on October 15, 2017 at 11:40am
आ. -नवीन मणि त्रिपाठी,
ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 15, 2017 at 9:40am
गुनगुनाने लायक, सुनाने लायक दिलचस्प, भावपूर्ण व विचारोत्तेजक ग़ज़ल के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय नवीनमणि त्रिपाठी जी।।
Comment by Mohammed Arif on October 15, 2017 at 7:29am
कुछ निशानियाँ भी छोड़ कर चले गए कहाँ ।
पास रह गया मेरे है आपका कलाम भी ।। बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । हर शे'र बढ़िया ।
शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।
नोट:- कितना अच्छा हो यदि आप जैसे ग़ज़गो साहित्य की अन्य विधाओं पर भी अपनी सृजनशीलता का परिचय देने वालों को भी नहीं पनी टिप्पणियों से पोषित करें ताकि उनका भी उत्साहवर्धन हो सकें ।सादर ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"सिर्फ कहो तो पल भर में ही, बन जाऊं हज्जाम। बाजूजी आओ मैं कर दूँ, आज तुम्हारे काम।   काम कठिन…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to मिथिलेश वामनकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85 में प्रस्तुत समस्त रचनाएँ
"धन्यवाद आपका "
2 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत ख़ूब! बहुत ख़ूब! बहुत ही सूक्ष्म चित्र निरीक्षम और सरस निरूपण । हार्दिक बधाई आदरणीय छोटे लाल जी ।"
3 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय प्रदीप जी.."
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई छोटेलालजी गरीब ग्रामीण युवती की महिमा में चित्र अनुरूप सुंदर सरसी छंद । हार्दिक बधाई"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बासुदेव भाईजी बड़ी खूबसूरती से आपने क्षेत्रीय शब्दों का प्रयोग कर चित्र अनुरूप  कामरूप…"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई छोटेलालजी रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार।"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बासुदेव भाईजी रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार। आपका कहन सही है"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविंद्र भाई रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार। खाना बना दी, खिला दी, का प्रयोग…"
4 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का )
"जनाब अभिनव साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
5 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"मुहतरम जनाब बासुदेव साहिब ,प्रदत्त चित्र के अनुरूप सुन्दर कामरूप छन्द हुए हैं, मुबारकबाद क़ुबूल…"
5 hours ago
रामबली गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी"
5 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service