For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog – November 2015 Archive (7)

इबादत कर रहा हूँ मैं

इबादत कर रहा हूँ कर रहा हूँ

कर रहा हूँ मैं।

खलल मत डालिये चेहरे की पुस्तक,

पढ़ रहा हूँ मैं।।



अभी मैं रोककर साँसों को,

प्राणायाम में रत हूँ।

विधाता की सुघर कृति के सघन,

अवधान में रत हूँ।

अभी मत बोलिये मन में ये प्रतिमा,

गढ़ रहा हूँ मैं।

खलल मत डालिये चेहरे की पुस्तक,

पढ़ रहा हूँ मैं।।



अभी धड़कन सँवरनी है,

अभी शृंगार करना है।

अभी बेजान से बुत पर,

हृदय का हार चढ़ना है।

नज़र मत डालिये प्रियवर मिलन को,

बढ़ रहा… Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on November 17, 2015 at 5:09pm — 4 Comments

मोहब्बत क्यूँ न कर लेती

1222 1222
~~~~~~~~~~~~~~
निगाहों में संवर लेती।
मुहब्बत क्यूँ न कर लेती?

बहुत सुंदर शहर है ये।
मेरे दिल की खबर लेती।।

उदासी का मैं दुश्मन हूँ।
तू दामन क्यूँ न भर लेती।।

नदी कब तक यूँ भटकेगी?
समन्दर में उतर लेती।।

तेरे ख्वाबों की मन्ज़िल हूँ।
कदम अपने इधर लेती।।

तू ख़ुश्बू और मैं "पंकज"।
आ मुझपे ही बिखर लेती।।

~~~~~~~~~~~~~~
मौलिक एवम् अप्रकाशित

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on November 15, 2015 at 8:11pm — 2 Comments

काहें खद्दर में? पंकज

खोज रहे हो सूत्र एकता, के तुम काहें खद्दर में।

नैतिकता का बलात्कार, होता है पार्टी दफ्तर में।।



अपनी टाँगें मोड़-माड़कर, खूब बचाकर पड़े रहो।

सोच रहे हो घर बस जाये, तम्बू वाले चद्दर में।।



संसाधन पर हक़ तब भी और, अब भी उन लोगों का है।

जो भी रहता है सत्ता के, इर्द-गिर्द के संस्तर में।।



नींद भला आती ही कैसे, उसकी बेबस आँखों में।

यादों के बादल बरसे वो, जगता रह गया बिस्तर में।।



दिल की धड़कन चलती रहती, ऐसे टूट नहीं जाती।

सच कहता हूँ धार… Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on November 11, 2015 at 11:49pm — 13 Comments

आइये महानुभाव

आइये महानुभाव!

बेख़ौफ़ आईये

मत घबराईये।।



ये गरीबखाना है

यहाँ सबका आना जाना है।



ये जो झीलंगहिया खटिया है न?

दर्द से चुर्र चुर्र ज़रूर कराहती है

पर यह सबके भार उठाती है।।



खैर!

आप मचिया पर बैठिये

किन्तु थोड़ा ठहरिये

इसे साफ़ कर देता हूँ

आपके लायक कर देता हूँ।



आपके श्वेतावरण का ध्यान है मुझे;

दाग अंदर हों, कोई बात नहीं

लेकिन

कपड़ों पर अच्छे नहीं लगते

ज्ञात है मुझे।।



बोलिये… Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on November 8, 2015 at 7:28pm — 8 Comments

जिसमें जितनी कीमत उतनी- पंकज मिश्र

16 रुक्नी ग़ज़ल

=====================================

नफ़रत का बाज़ार सजा है; हममें जितनी, कीमत उतनी।

इच्छाओं का दाम लगा है, खुदमें जितनी, कीमत उतनी।।



इस पुस्तक के पन्नों पर तुम, नैतिकता क्यों कर लिखते हो।

मानवता की छद्म व्याख्या, इसमें जितनी, कीमत उतनी।।



व्यवहार और समाचार में, सिर्फ एक सम्बन्ध यही है।

नमक मिर्च की हुई मिलावट, इनमें जितनी, कीमत उतनी।।



कलयुग वाले महाराज के, दरबारी मानक बदले हैं।

चाटुकारिता भरी हुई है, जिसमें…

Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on November 7, 2015 at 9:30am — 13 Comments

तुम इस ही बहाने आओ भी

16 रुक्नी ग़ज़ल

=================================

हम अब भी साँसें खींच रहे; कुछ और सितम तुम ढ़ाओ भी।

दीदार तो होगा कम से कम; तुम इस ही बहाने आओ भी।।



कल सुब्ह चले जाना ये शब, तूफ़ान भरी को बीतने दो।

बादल झरते हैं आँखों से, बरसात है तुम रुक जाओ भी।



अरमान भरे दिल की दुनिया, उजड़ी है अभी बर्बाद हुई।

बस बाकी है दीवार ज़रा, माटी में इसको मिलाओ भी।।



तैयार ज़रा कर दो मुझको, बिखरा बिखरा हूँ ठीक नहीं।

शृंगार अधूरा है मेरा, कुछ मोती मुझपे चढ़ाओ… Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on November 2, 2015 at 10:30pm — 18 Comments

मन की देवी कुछ पल ठहरो

2222 2222 2222 2222

(16 रुक्नी ग़ज़ल- बीच बीच में 2 मात्रा को 1-1 भी लिखा गया है)

=====================================

मन की देवी कुछ पल ठहरो, मैं तेरा शृंगार तो कर लूँ।

इन आँखों से झरते हैं जो, उन मोती के हार तो गढ़ लूँ।।



जिस मन्दिर को तोड़ चली हो, उससे बहते रक्तिम रस से।

तेरे इन गोरे हाथों पर, मेहदी बन कर आज बिखर लूँ।।



कुंडल कंगन बिंदिया बाली, ये तेरे होंठों की लाली।

दिल की भष्म से करके टीका, इनकी नज़र मैं आज तो हर लूँ।।



जाना है तो… Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on November 1, 2015 at 10:46am — 10 Comments

Monthly Archives

2022

2021

2019

2018

2017

2016

2015

1999

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
Thursday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Thursday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Wednesday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service