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प्रतिबंधित मुलाकात हुई है-ग़ज़ल

22 22 22 22

उनसे मेरी बात हुई है
प्रतिबंधित मुलाक़ात हुई है

सारे स्वप्न तरल हैं मेरे
देखो तो बरसात हुई है

स्याही बन कर भस्म्है बिखरी
यूँ न अधेरी रात हुई है

मन खुद में ही खोज खुदी से
शांति कहाँ, आयात हुई है

दिल वो जीते दर्द मग़र हम
मत समझो बस मात हुई है

मौलिक अप्रकाशित

Views: 378

Comment

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Comment by surender insan on January 11, 2018 at 4:32pm

वाह जी वाह बहुत बढ़िया अशआर जी। बधाई स्वीकार करे जी।

उन2से2 मे2री2 बा2त1 हु1ई2है2

प्रतिबंधित मुलाक़ात हुई है

सानी की तक़तीय बताये ।

सादर जी।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 11, 2018 at 4:26pm

आदरणीय लक्ष्मण सर जी सादर आभार

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 11, 2018 at 4:26pm

प्रिय सतविंदर भाई जी सादर आभार

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 11, 2018 at 3:03pm

आ. भाई पंकज जी, अच्छी गजल हुई है हार्दिक बधाई ।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 10, 2018 at 11:24pm

बेहतरीन आदरणीय पंकज भाई साहब।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 10, 2018 at 10:45pm

आदरणीय बृजेश जी तारीफ के लिए बहुत बहुत आभार

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 10, 2018 at 10:45pm

आदरणीय अफरोज जी आपके द्वारा सुझाई गई कमी को दूर करने के लिए मैंने शेर में परिवर्तन कर दिया

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 10, 2018 at 10:11pm

क्या कहने आदरणीय बहुत ही खूब ग़ज़ल कहीं..सादर

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 9, 2018 at 10:25pm

आदरणीय अफ़रोज़ जी, आपकी बात सही है, सुधार होना चाहिए, शुक्रिया

Comment by Afroz 'sahr' on January 9, 2018 at 5:05pm
जनाब पंकज जी हिफ़ाज़त "सौंपी" जाती है । सौंपा नहीं जाता,,,,वैसे आपने आपके हिसाब से सही बाँधा है तो कोई बात नहीं आप स्वतंत्र हैं ।,,,,,

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