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बसंत कुमार शर्मा's Blog – September 2017 Archive (3)

और सुना, क्या हाल-चाल है

एक नवगीत 

दूर बैठ कर पूछें दद्दा,

और सुना, क्या हाल-चाल है.

कैसे कह दूं, ठीक-ठाक सब,

मस्त हमारी चाल-ढाल है  

 

तोड़ रहे हैं सभी आजकल,

अपना नाता गाँधी से.

सपनों की कंदीलें उनकी,

बचा रहा हूँ आँधी से.…

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Added by बसंत कुमार शर्मा on September 22, 2017 at 5:02pm — No Comments

ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

 

मापनी 1222 1222 1222 1222

इधर  जाता तो अच्छा था, उधर जाता तो अच्छा था.

रहा भ्रम में, कहीं पर यदि, ठहर जाता तो अच्छा था.

 

उभर आता तो अच्छा था, हृदय का घाव चेहरे पर,

हमारा  दर्द  भी हद से, गुजर जाता तो अच्छा था.

 …

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Added by बसंत कुमार शर्मा on September 17, 2017 at 5:30pm — 17 Comments

वादों की बरसात न कर

मापनी  २२ २२ २२ २ 

इतनी ज्यादा बात न कर

वादों की बरसात न कर



टूट न  जाए नाजुक दिल,

उससे भीतरघात  न कर



ख्यात न हो, कुछ बात नहीं,…

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Added by बसंत कुमार शर्मा on September 15, 2017 at 8:30pm — 18 Comments

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