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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog – June 2019 Archive (7)

ये हुआ है कैसा जहाँ खुदा यहाँ पुरख़तर हुई ज़िंदगी (५२)

(११२१२ ११२१२ ११२१२ ११२१२ )

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ये हुआ है कैसा जहाँ खुदा यहाँ पुरख़तर हुई ज़िंदगी

न किसी को ग़ैर पे है यक़ीं न मुक़ीम अब है यहाँ ख़ुशी

**

कहीं रंज़िशें कहीं साज़िशें कहीं बंदिशें कहीं गर्दिशें

कहाँ जा रहा है बता ख़ुदा ये नए ज़माने का आदमी

**

कहीं तल्ख़ियों का शिकार है कहीं मुफ़्लिसी की वो मार है

मुझे शक है अब ये बशर कभी हो  रहेगा ज़ीस्त में शाद भी

**

कहीं वहशतों का निज़ाम है कहीं दहशतें खुले-आम हैं 

मिले आदमी से यूँ आदमी मिले अजनबी से जूँ…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 30, 2019 at 2:30am — 1 Comment

ग़म को क़रीब से मियाँ देखा है इसलिए(५१)

(२२१ २१२१ १२२१ २१२ )

ग़म को क़रीब से मियाँ देखा है इसलिए

अपना ही दर्द ग़ैर का लगता है इसलिए'

**

जब और कोई राह न सूझे ग़रीब को

रस्ता हुज़ूर ज़ुर्म का चुनता है इसलिए

**

बाज़ार के उसूल हुए लागू इश्क़ पर

बिकता है ख़ूब इन दिनों सस्ता है इसलिए

**

आसाँ न दरकिनार उसे करना ज़ीस्त से

दिल का हुज़ूर आपके टुकड़ा है इसलिए

**

उनके ज़मीर के हुए चर्चे जहान में

मिट्टी के भाव में…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 28, 2019 at 11:00pm — 4 Comments

सुकून-ओ-अम्न पर कसनी ज़िमाम अच्छी नहीं हरगिज़(५० )



सुकून-ओ-अम्न पर कसनी ज़िमाम अच्छी नहीं हरगिज़

अगर पैहम है तकलीफ़-ए-अवाम अच्छी नहीं हरगिज़

**

निज़ामत देखती रहती वतन में क़त्ल-ओ-गारत क्यों

नज़रअंदाज़ की खू-ए-निज़ाम अच्छी नहीं हरगिज़

**

न रोके तिफ़्ल की परवाज़ कोई भी ज़माने में

कभी सपने के घोड़े पर लगाम अच्छी नहीं हरगिज़

**

किसी को हक़ नहीं है ये कि ले क़ानून हाथों में

मगर सूरत वतन में है ये आम अच्छी नहीं हरगिज़

**

क़ज़ा को घर बुलाना है तुम्हें तो ख़ूब पी लेना

वगरना मय है पक्की या है ख़ाम अच्छी…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 27, 2019 at 9:15pm — 5 Comments

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी (४९)

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी

इस चमन में साथ साथ फूल भी हैं ख़ार भी

**

देखते बदलते रंग मौसमों के इश्क़ में

हिज्र की ख़िज़ाँ कभी विसाल की बहार भी

**

इंतज़ार की घड़ी नसीब ही नहीं जिसे

क्या पता उसे है चीज़ लुत्फ़-ए-इंतिज़ार भी

**

कीजिये सुकून चैन की न बात इश्क़ में

इश्क़ में क़रार भी है इश्क़ बे-क़रार भी

**

चश्म इश्क़ में ज़ुबान का हुआ करे बदल

जो शरर बने कभी कभी है आबशार भी

**

प्यार एक फ़लसफ़ा है और नैमत-ए-ख़ुदा

रंज़ है इसे बनाते लोग…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 24, 2019 at 1:30pm — 4 Comments

मन के आँगन में फूटा जो प्रीतांकुर नवजात |(४८ )

एक गीत

==========

मन के आँगन में फूटा जो

प्रीतांकुर नवजात |

खाद भरोसे की देकर अब

सींच इसे दिन-रात |

**

ध्यान रहे यह इस जीवन का

बीत गया बचपन |

आतुर है दस्तक देने को

अब मादक यौवन |

उर-आँगन में जगमग हर पल

सपनों के दीपक

और रही झकझोर हृदय को

यह बढ़ती धड़कन |

वयः संधि का काल हृदय में

भावों का उत्पात |

खाद भरोसे की देकर अब

सींच इसे दिन-रात…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 23, 2019 at 12:30pm — 4 Comments

ताज़ा गर दिल टूटा है तो वक़्त ज़रा दीजै (४७ )

ताज़ा गर दिल टूटा है तो वक़्त ज़रा दीजै 

क़ायम रखना रिश्ता है तो वक़्त ज़रा दीजै 

**

सिर्फ़ शनासाई से होता प्यार कहाँ मुमकिन 

इश्क़ मुक़म्मल करना है तो वक़्त ज़रा दीजै 

**

पहले के दिल के ज़ख़्मों का भरना है बाक़ी 

ज़ख़्म नया गर देना है तो वक़्त ज़रा दीजै 

**

ख़्वाब कभी क्या बुनने से ही होता है कामिल 

पूरा करना सपना है तो वक़्त ज़रा…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 13, 2019 at 1:30am — 2 Comments

किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )

कैसे होते हैं  फ़ना प्यार निभाने के लिए 

छोड़ जाऊंगा नज़ीर ऐसी ज़माने के लिए 

**

रूह का हुस्न जिसे दिखता वही आशिक़ है 

जिस्म का हुस्न तो होता है लुभाने के लिए 

**

दरमियाँ गाँठ दिलों के जो पड़ी कब सुलझी 

कौन दीवार उठाता है गिराने के लिए 

**

अच्छे लोगों की कमी रहती है क्या जन्नत में 

क्यों ख़ुदा उनको है तैयार बुलाने…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 8, 2019 at 12:30pm — 4 Comments

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