स्वप्न-भाव
मुझको सपने याद नहीं रहते
दर्द की कोख से जन्मे एक सपने के सिवा
आत्मीय पहचान का गहरापन ओढ़े
बार-बार लौट आता है वह
पलकों के पीछे के अंधेरों से धीरे-धीरे
जीवन के अंगारी तथ्यों की…
ContinueAdded by vijay nikore on May 24, 2015 at 8:30pm — 16 Comments
अकेला-एकान्त
असंग आत्म-विश्वास का
गम्भीर भान
अकेला-एकान्त
कभी करी हुई विलीन हुई बातें
अनबूझा विशाद
संसारी गतिविधियों से
परिवर्तित प्रवृत्तियों से
बदले व्यवहार से शब्दों की चोट से
कुछ हुआ अचानक
हमारे बीच का बहता वह सुगम प्रवाह
घनिष्ठ अपनत्व
अमृत-सा सुख
सूख गया
खुशियों का हिस्सा जो लगता था मेरा था
अब मेरा न था
असंवेदनाओं के धरातल पर…
ContinueAdded by vijay nikore on May 13, 2015 at 12:30am — 18 Comments
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