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Kalpna mishra bajpai's Blog – March 2014 Archive (9)

परिक्रमा

न जानें कितने जीवन से परिक्रमा

ही तो करती आई हूँ ,

क्या पाया ?क्या खोया ?

पता नहीं भूली हूँ माया के जाल में ।



बस एक मेरा "मैं "

तैयार रहता मुझ पर हर दम,

कहता, मैं ही हूँ सबसे अच्छा ।



पर ये क्या सच है ?

नहीं ये हमारे "मैं "

का ही भ्रम है ।



घूमी हूँ यहाँ से वहाँ ,

लगाईं हैं कई जन्मों की

परिक्रमाएँ,

चुनी हैं मायेँ कई,

हर पल माना खुद को सही।



क्या ये सच है?…

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Added by kalpna mishra bajpai on March 27, 2014 at 6:45pm — 5 Comments

संध्या बेला मधुरिम मधुरिम

संध्या बेला मधुरिम पल है

लाल कपोल लिए तन सूरज

ढलता पल-पल छिन-छिन हर पल

सहलाती पद उसके संध्या

करती सेवा उसकी रज-रज। 

मृग़ छौने थक जाते चलकर

दिवा चली सुस्ताने पल भर

स्वप्निल सपने देती संध्या

सब को मंजिल तक पहुंचाकर। 

बीता वासर बिछी चाँदनी

वृक्ष खड़े अलसाए लत-पत

खग और विहग पुकारे हरि को

वन्य माधुरी फैली इत-उत। 

सोचो संध्या गर ना होती

तो क्या सो पाते हम जी भर?

कर पाते,…

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Added by kalpna mishra bajpai on March 18, 2014 at 9:00pm — 6 Comments

दोहे (भाग २)

    १११  १११२  ११ १११, १११२  ११११ ११

9-) मान बड़ाई सब चहे, कितनी इसकी हद।

     दूजे को देते नहीं, पोषत खुद का मद॥ 

10-) मात-पिता व गुरु से, हर दम बोलत झूठ।  

       आपा भीतर झांक लो, हरि जाएगा रूठ॥

11-) ज्ञान क्षुदा उर में लिए, ढूंढत फिरत सुसंग।

       उर की आंखे खोल लो, जग में भरो कुसंग॥

12-) धन दौलत कुछ न बचे, तब तक मन में चैन।

       चरित्रिक बल सबल है, ना हो तुम बेचैन॥ 

13-) जनम-मरण के…

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Added by kalpna mishra bajpai on March 14, 2014 at 2:30pm — 3 Comments

"मौन" लघु कथा

(मौन) शब्द से सभी परिचित है .... कौन नहीं जनता इस शब्द की विशालता को.....

आज 22 अप्रेल है पूरा एक साल हो गया दोनों को गए हुए, सुधा मन ही मन बुदबुदा रही थी।जरा चाय लाना बालकनी से पति ने आवाज लगाई। चाय तो बनी और पी भी रहे थे दोनों लेकिन सुधा क्षुब्ध, अकेली, बेचैन सी लग रही थी।आज का उजला-उजला नरम सबेरा भी अपना जादू न चला पा रहा था, महेश ने सुधा को हिलाते हुए कहा कहाँ हो? यहीं मीठी ...... क्या हो गया है तुमको ?

सुधा नम आँखों से महेश की ओर देख कर बोली गर ना पढ़ाते…

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Added by kalpna mishra bajpai on March 12, 2014 at 11:00pm — 9 Comments

कुछ दोहे

प्रथम प्रयास ............

1-) देह लता प्रभु दीन्ह है, काहे करत गुमान,

पर सेवा उपकार कर ,तब हीं पावे मान ।

2- ) सुत, दारा अरु बन्धु सब, स्वारथ को संसार,

भज लो साईं राम को, खुद का जनम संभार

3- ) मन मैला तन साफ है, क्यों फैलाये जाल ,

हरी को भावत साफ मन, लिखलो अपने भाल ।

4-) मंदिर, पूजा ,यज्ञ,तप, ऊपर का व्यापार ,

मन मंदिर नित झाढ़ लो, पाओगे प्रभु द्वार

5-) चौरासी…

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Added by kalpna mishra bajpai on March 11, 2014 at 4:30pm — 12 Comments

सरस्वती वंदना

हे हंस वाहिनी प्रमुदित स्वर दो

माँ कल्याणी करुणा कर दो

हे हंस .........

ध्यान करूँ माँ तेरा निस -दिन

मंद बुद्धि को नूतन अक्षर दो

अहंकार का नास करो माँ

वीणा पाणि जाग्रत कर दो

हे हंस ..........

जीवन में छाया अँधियारा

ज्योतिर्मय उर आँगन कर दो

हो जाए मन में उजियारा

वरद हस्त सिर पर माँ रख दो

हे हंस ...........

पल -पल चिंतन रहे चिरंतर

इतनी उर में शक्ति भर दो

स्वप्नों में…

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Added by kalpna mishra bajpai on March 6, 2014 at 9:30pm — 5 Comments

मैं नारी हूँ ( कल्पना मिश्रा बाजपेई)

मैं नारी हूँ .. "कुसुम अवदात नहीं हूँ"

सौंदर्य बोध से गढ़ी हूँ 

मानवता के लिए कड़ी हूँ

सबके के लिए अहिर्निश खड़ी हूँ

भावनाओं से नित जड़ी हूँ

कभी किसी से नहीं हूँ कम,

इस बात पर अड़ी हूँ 

मैं नारी हूँ..... बिन स्वर का गान नहीं हूँ ।

दिल में उत्साह भरा है अपरिमित

हर वक्त सेवा में हूँ समर्पित 

शक्तियों से हूँ मैं निर्मित

जो चाहूँ वो करती हूँ अर्जित

इससे हूँ में सदा ही गर्वित

मैं नारी…

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Added by kalpna mishra bajpai on March 4, 2014 at 4:00pm — 21 Comments

फागुन का मास

फागुन का मास

तारों की बारात

चाँदनी के रथ पर

आएगा मोहन

यमुना के तीर

होके अधीर, में तो उसकी हो जाऊँगी ।

श्यामल सा मनोहर गात

पीला सा सिर पर पाग

कानों में कुंडल

अधरों पे मोती

धरे तिरछा पैर

छोड़ सब की खैर, मै तो चरणन में गिर जाऊँगी ।

होंठों की शान

प्यारे की मुस्कान

मीठी सी चितवन

सखियों का लूटे मन

कर के सब जतन, मै तो उनकी हो जाऊँगी ।

माँ यशोदा का…

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Added by kalpna mishra bajpai on March 2, 2014 at 2:30pm — 8 Comments

अकेलापन

हाय! अकेलापन क्यों?

बोझिल सा लगता है

अकेलापन तो स्वर्णिम क्षण है

अपने आप को जानने का पल है

क्यों मानव इससे घबराए?

यह तो सबका बल है। 

अकेलापन शक्ति देता है…

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Added by kalpna mishra bajpai on March 1, 2014 at 6:00pm — 12 Comments

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