For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

फागुन का मास

तारों की बारात

चाँदनी के रथ पर

आएगा मोहन

यमुना के तीर

होके अधीर, में तो उसकी हो जाऊँगी ।

श्यामल सा मनोहर गात

पीला सा सिर पर पाग

कानों में कुंडल

अधरों पे मोती

धरे तिरछा पैर

छोड़ सब की खैर, मै तो चरणन में गिर जाऊँगी ।

होंठों की शान

प्यारे की मुस्कान

मीठी सी चितवन

सखियों का लूटे मन

कर के सब जतन, मै तो उनकी हो जाऊँगी ।

माँ यशोदा का छैया

बलदाऊ का भैया

राधा से करे मनुहार 

मेरा दिल करे गुहार 

मैं मन मार एक टक निहारूंगी ।

है भक्तों की पुकार

प्रभु सुन लो एक बार

आओ दिल के मँझार

मेरे नैना भाए बेजार

मैं तो, नेहा तुम संग लगाऊँगी ।

कल्पना मिश्रा बाजपेई

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 528

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by kalpna mishra bajpai on March 10, 2014 at 6:21pm

आदरणीया प्राची मैडम आप का सुझाव सिर आँखों पर ।आप ने रचना को देखा पढ़ा बहुत बहुत आभार /सादर !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 10, 2014 at 10:38am

मनोहर भाव 

पर अब शिल्प पर भी अवश्य ही साधा प्रयास हो 

शुभकामनाएं आ० कल्पना मिश्रा बाजपेयी जी 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 5, 2014 at 3:52pm

आदरणीय जितेंन्द्र जी, आदरणीया सारिता जी सराहना हेतु बहुत बहुत आभार सादर !!     

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 5, 2014 at 8:38am

बहुत सुंदर व् कोमल भाव, बधाई स्वीकारें आदरणीया कल्पना जी

Comment by Sarita Bhatia on March 4, 2014 at 3:47pm

वाह सुन्दर चित्रण मन के भावों का ,बधाई आपको कल्पना जी 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 4, 2014 at 3:40pm

आदरणीया अन्नपूर्णा दी और आदरणीया मीना दी सराहना हेतु आभार सादर  

Comment by Meena Pathak on March 4, 2014 at 10:46am
Sundar Rachna .. Badhai
Comment by annapurna bajpai on March 2, 2014 at 11:32pm

होंठों की शान

प्यारे की मुस्कान

मीठी सी चितवन

सखियों का लूटे मन

कर के सब जतन, मै तो उनकी हो जाऊँगी ।............................... सुंदर पंक्तियाँ 

माँ यशोदा का छैया

बलदाऊ का भैया

राधा से करे मनुहार 

मेरा दिल करे गुहार 

मैं मन मार एक टक निहारूंगी ।.......................... इस पंक्ति मे कुछ अधूरा सा लगता है कल्पना जी , शायद आप कुछ और                                                                            कहना चाह  रही है । 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Monday
Sushil posted blog posts
Monday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Monday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service