For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – February 2023 Archive (8)

गीत(१९)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

अपनेपन में विद्व नगर से, अच्छा अनपढ़ गाँव

भरी दुपहरी मिल जाती है, जहाँ पेड़ की छाँव।।

*

नगर हमेशा दुख देकर  ही, माने  अपनी जीत

आँगन चाहे एक नहीं पर, खड़ी बहुत हैं भीत

अपनों की तो बात अलग है, रही गाँव की रीत



किसी पराये का भी दुख में, सहला देता पाँव

अपनेपन में विद्व नगर से, अच्छा अनपढ़ गाँव।।

*

सकी माँगें नहीं असीमित, रोटी कपड़ा गेह

जिसे नगर सा नहीं ठाठ से, होता पलभर नेह

मन में सेवाभाव…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 24, 2023 at 6:17pm — 2 Comments

इस जीवन में कहाँ मिलेगा( गीत-(१८)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

दिखता है हर ओर  यहाँ  तो केवल दुख का बौर।

इस जीवन में कहाँ मिलेगा हमको सुख का ठौर।।

*

घाव कुरेदे पल  पल  दुनिया कर बैठी नासूर।

इस कारण ही घर कर बैठी पीर यहाँ भरपूर।।

औषध कोई काम न  करती मत बोलो अब और।

इस जीवन में कहाँ मिलेगा हमको सुख का ठौर।।

*

शीतल छाँव नहीं है वन में दावानल की आग।

तानसेन  की  सुता  न  कोई गाती बादल राग।।

बन्द झरोखों को क्या खोलें उमस भरा जब दौर।।

इस जीवन में कहाँ मिलेगा हमको सुख का ठौर।।

*

अब…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 21, 2023 at 7:31am — 2 Comments

हर जंगल को नित्य मिटाने(गजल)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२२२/२२२२/२२२२/२२२

आँखों में घड़ियाली  आँसू  अधरों पर चिंगारी हो

उन लोगों से बचके रहना जिनमें ढब हुशियारी हो।१।

*

सिर्फ जरूरत भर को लोगो पेड़ काटना अच्छा है

हर जंगल को नित्य मिटाने क्यों हाथों में आरी हो।२।

*

सभी पीढ़ियों कई युगों की यही धरोहर इकलौती

सिर्फ तुम्हारी एक जरूरत क्यों धरती पर भारी हो।३।

*

अल्प जरूरत अति बताकर नष्ट करो मत धरती

आज कहीं तो सुन्दर अच्छे आगत…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 16, 2023 at 7:01am — 2 Comments

प्यार करने के लिए मौसम नहीं मन चाहिए ( गीत-१७)-



शोर है चहुँ ओर ,आया प्यार का मौसम, मगर

प्यार करने  के  लिए  मौसम  नहीं मन चाहिए।।

*

भोग का आनन्द क्षण भर तृप्ति का आभास दे।

वह न हो पाया तो मन को हार का अहसास दे।।

कौन शिव सा अब शती की देह थामें डोलता।

ओट पाते  वासना  के  द्वार  पलपल खोलता।।

भोगने को तन तनिक उत्तेजना का पल बहुत।

प्यार करने  के  लिए  तो  पूर्ण जीवन चाहिए।।

*

देखता हर पथ सुगढ़ जाता यहाँ है प्यास तक।

आ सका है कौन अब संभोग से संन्यास तक।।

आज उपमा लिख  रही  उपभोगवादी…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 13, 2023 at 6:35pm — 3 Comments

यादों ने यादों की खिड़की-(गीत-१६) -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

यादों ने यादों की खिड़की, जब खोली अँगनाई में।

नये वर्ष की  अँखियाँ  भीगी, बीती  जून जुलाई में।।

*

हिचकी आयी भोर भये से,ना रुकने का नाम लिया।

तभी पुरानी राहों ने  फिर, सोचा किसने याद किया।।

पलपल, पगपग जाने कितने, रंगो को था नित्य जिया

कई सूरतें उभरीं  मन  में, गठरी  को जब  खोल दिया।।

*

चुपके-चुपके नभ रोया नित, शरद भरी जुन्हाई में।

यादों ने यादों की खिड़की, जब खोली अँगनाई में।।

*

कितना चाहो भले भूलना, हिर फिर…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 12, 2023 at 5:42am — No Comments

पथ पर चलते रहो निरंतर(गीत-१५)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

पग की गति हो चाहे मन्थर।

पथ पर  चलते  रहो निरंतर।।

*

सूनापन  हो   या  निर्जन  हो।

तमस भले ही बहुत सघन हो।।

विचलित थोड़ा भी ना मन हो।

मत पाँवों में  कुछ अनबन हो।।

*

शूल चुभें या कंकड़ पत्थर।।

पथ पर चलते रहो निरंतर।।

*

जो भी इच्छित क्यों सपना हो।

चाहे जितना भी खपना हो।।

हर नूतन पथ बस अपना हो।

धैर्य न डोले जब तपना हो।।

*

मत करना जीवन में अन्तर।

पथ पर चलते रहो निरंतर।।

*

अंतिम परिणति जैसी भी हो।

जीवन  से …

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 10, 2023 at 12:24pm — No Comments

चन्दा मामा! हम बच्चों से (बालगीत) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

रूठे हो बहनों से या फिर,  मद में अपने चूर बताओ।

चन्दा मामा! हम बच्चों से, क्यों हो इतने दूर बताओ।।

*

जल भरकर थाली में माता, हमको तुमसे भले मिलाती।

किन्तु काल्पनिक भेंट हमें ये, थोड़ा भी तो नहीं सुहाती।।

हम बच्चों की इच्छा खेलें, यूँ नित चढ़कर गोद तुम्हारी।

लेकिन तुमको भला बताओ, कब आती है याद हमारी।।

*

कौन काम से निशिदिन इतने, हो जाते मजबूर बताओ।

चन्दा मामा! हम  बच्चों  से, क्यों  हो  इतने दूर बताओ।।

*

हमको भी तुम जैसा भाता, ये लुका छिपी का…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2023 at 11:07am — 2 Comments

दोहे वसंत के - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

जिस वसंत की खोज में, बीते अनगिन साल

आज स्वयं ही  आ  मिला, आँगन में वाचाल।१।

*

दुश्मन तजकर दुश्मनी, जब बन जाये मीत

लगते चहुँ दिश  गूँजने, तब  बसन्त के गीत।२।

*

आँगन में जिस के बसा, बालक रूप वसन्त

जीवन से उसके हुआ, हर पतझड़ का अन्त।३।

*

कहने को आतुर हुए, मौसम अपना हाल

वासन्ती  संगत  मिली, हुए  मूक  वाचाल।४।

*

करने कलियों को सुमन, आता है मधुमास

जिसके दम पर ही मिटे, हर भौंरे की प्यास।५।

*

आस बँधा कर पेड़ को, हवा…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 2, 2023 at 1:00pm — 3 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
Monday
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service