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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – February 2018 Archive (4)

इक दिन की बात हो तो इसे भूल जाएँ हम - तरही गजल- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"



221   2121     1221      212



सुनता खुदा  न यार  सदाएँ  तो क्या करें

करती असर न आज दुआएँ तो क्या करें ।१।



इक दिन की बात हो तो इसे भूल जाएँ हम 

हरदिन का खौफ अब न बताएँ तो क्या करें।२।



इक वक्त था कि लोग बुलाते थे शान  से

देता न  कोई  आज  सदाएँ  तो क्या करें।३।



शाखों लचकना सीख लो पूछे बगैर तुम 

तूफान बन  के  टूटें  हवाएँ तो  क्या करें।४।…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 26, 2018 at 6:30pm — 6 Comments

दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल



१२२ १२२ १२२ १२२

दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं

सियासत में सब तिलमिलाने लगे हैं।१।



घोटाले वो सबके गिनाने लगे हैं

मगर दोष अपना छिपाने लगे हैं।२।



वतन डूबता है तो अब डूब जाये

सभी खाल अपनी बचाने लगे हैं।३।



रहे कोयले की दलाली में खुद जो

गजब  वो भी उँगलीउठाने लगे हैं।४।



दिया था भरोसा कि लुटने न देंगे

वही बेबसी  अब …

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 19, 2018 at 4:00pm — 20 Comments

दाग कितने नित लगाओगे वतन के भाल पर -- (गजल)-- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२ २१२२ २१२२ २१२



खूब नजरें  जो  गढ़ाये  हैं  पराये  माल पर

है भरोसा खूब उनको दोस्तो घड़ियाल पर।१।



भूख बेगारी औ'  नफरत है पसारे पाँव बस

अब भगत आजाद रोते हैं वतन के हाल पर ।२।



आज सम्मोहन  कला  हर नेता को आने लगी

है फिदा जनता यहाँ की हर सियासी चाल पर।३।



खुद  पहन  खादी  चमकते पूछता हूँ आप से

दाग कितने नित लगाओगे वतन के भाल पर।४।



ऐसा होता तो सुधर  जाते  सभी हाकिम यहाँ

वक्त जड़ता पर कहाँ है अब तमाचा गाल…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 11, 2018 at 10:25pm — 8 Comments

फितरत नहीं छिपती है - (गजल)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२१ १२२२ २२१ १२२२



नफरत के बबूलों को आँगन में उगाओ मत

पाँवों में स्वयं के अब यूँ शूल चुभाओ मत।१।



ऐसा न हो यारों फिर बन जायें विभीषण वो

यूँ दम्भ में इतना भी अपनों काे सताओ मत।२।



फितरत नहीं छिपती है कैसे भी मुखौटे हों

समझो तो मुखौटे अब चेहरों पे लगाओ मत।३।



माना कि तमस देता तकलीफ बहुत लेकिन

घर को ही जला डाले वो दीप जलाओ मत।४।



ढकने को कमी अपनी आजाद बयानों पर

फतवों के मेरे  हाकिम  पैबंद  लगाओ…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 1, 2018 at 6:00am — 15 Comments

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