For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

SANDEEP KUMAR PATEL's Blog – January 2013 Archive (16)

"समीकरण"

"समीकरण"

कागज़ पर

दिल के समीकरणों से उलझा

सिद्ध क्या करना है ???

मुहब्बत

नफरत

आज़ादी

या बंदिशें

क्या हल होगा ??

कर्म करो फल बाद में देखेंगे

किन्तु आगाज कहाँ से करूँ

दिल से

या दिमाग से ???

लीजिये बन गया न

समीकरण

एक वाक्य

हमारे बड़े बड़े शाश्त्र कहते हैं

प्रेम अनंत है

अर्थात

प्रेम बराबर अनंत

अनंत अर्थात

अर्थात

हाँ गगन

तो प्रेम बराबर गगन

अर्थात प्रेम

गगन के समतुल्य है…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 31, 2013 at 4:23pm — 5 Comments

बहुत अच्छी है या रिश्वत बुरी है

वो जो कहते थे के चाहत बुरी है

दिवाने हो गए हालत बुरी है

बना अंधा फखत मगरूर कर दे

बढे गर इस कदर ताकत बुरी है

पचा पाए नहीं खैरात की जो

वही कहते हैं के दावत बुरी है

गँवा चैनो सकूँ ईमान अपना

पता पड़ता है के दौलत बुरी है

कहो मत बेबफा हमको हमनवा  

क़ज़ा दे दो न ये जिल्लत बुरी है

उसे लगता है दिल्लगी हँसना

मेरे हँसने की यूँ आदत बुरी है  

कतारों में खड़े रहना है…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 30, 2013 at 10:06pm — 6 Comments

रिवाजो रस्म क्या सब कुछ बदल दिया तूने

जुरत-आमोज मेरे दिल ये क्या किया तूने

खगूर-ए-हम्द से भी कर लिया गिला तूने



फ़िक्रे-फ़र्दा न कोई गम कभी रहा हमको

कजा से संग दिल मेरे बचा लिया तूने



सुखन में आ गए हो ऐब ढूँढने लेकिन

हमनवा ये बता कितना जहर पिया तूने



अजल से चल रहा है क्या कभी ये सोचा है

रिवाजो रस्म क्या सब कुछ बदल दिया तूने



खुदा से मांग लो अब गैर के लिए भी कुछ

जिया अपने लिए तो "दीप" क्या जिया तूने ??



संदीप पटेल "दीप"



जुरत-आमोज - साहस सिखाने…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 29, 2013 at 9:09pm — 14 Comments

परेशानियाँ

बिन बुलाये आ जाती हैं

कहने पर कहाँ जाती हैं

और हम भी दिन- रात

सोते- जागते

उठते-बैठते 

उन्ही को याद करते हैं

उन्ही के बारे में सोचते हैं

उनके बिन जैसे जीना मुहाल है  

हमारे पास वक़्त नहीं है

और वो ठहरे फ़ुरसतिया 

फिर भी कौन ऐसा है 

जो नहीं करता उनकी खातिर

आखिर हैं तो अपनी ही न

छोड़ भी तो नहीं सकते

जीने के लिए वही तो वजह है

.

.

.

.

.

कितनी अजीज होती हैं न !

ये "परेशानियाँ"



संदीप पटेल…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 27, 2013 at 8:42pm — 5 Comments

ग़ज़ल "सजा कर रख लिया हमने जो खाली आबगीने को "

============ग़ज़ल =============

उड़ा कर छत हवा जब जब करे जाया पसीने को 

गरीबी कोसती फिरती है तब सावन महीने को 



बफा करने के बदले बेबफाई जब मिली यारो 

बढ़ा दर्द-ए जिगर हद से नहीं आराम सीने को 



मेरे हमराज मुझको इक शराबी मान बैठे हैं 

सजा कर रख लिया हमने जो खाली आबगीने को 



इलाहबाद जाकर पापियों ने पाप यूँ धोये 

हुई गंगा वहाँ मैली बचा पानी न…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 22, 2013 at 4:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल "अंधेरों को बहुत खलने लगे हैं"

======ग़ज़ल========

बहरे हजज मुसद्दस् महजूफ

वजन-1222/1222/122



दियों में तेल हम भरने लगे हैं

अंधेरों को बहुत खलने लगे हैं



नहीं रूकती हमारी हिचकियाँ भी

हमें वो याद यूँ करने लगे हैं…



Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 16, 2013 at 3:30pm — 11 Comments

दोहे

==========दोहे===========…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 15, 2013 at 3:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल

=========ग़ज़ल=========

बहरे जदीद मुसद्दस महजूफ मक्फूफ़ मुतव्वी

वजन - 212 2121 2112



बात करना बड़ी बड़ी ही सही

झूठ हो या सही सही ही सही



इश्क के हर कदम पे वादे हों

तब तो करना है दोस्ती ही सही



गरचे…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 12, 2013 at 6:25pm — 5 Comments

"ग़ज़ल"जिसे देखा नहीं हमने उसे भगवान बोलेंगे

===========ग़ज़ल=============

बहर-ए-हजज मुसम्मन सालिम 

वजन- 1222 / 1222 / 1222 / 1222 



गरीबों का दमन करके जो सीना तान बोलेंगे 

झुकाए सर उन्ही को आप तुर्रम खान बोलेंगे 



सिपाही काठ के पुतले बने फिरते हैं राहों में 

कसम खाई वो करने जो…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 11, 2013 at 3:30pm — 8 Comments

कभी तो पास में आकर सदा सुनो दिल की

==========ग़ज़ल===========

कभी तो पास में आकर सदा सुनो दिल की
ज़रा सी चाह और ये इल्तजा सुनो दिल की

कहीं भी आप रहो हो न कोई दर्दो गम
जुबाँ से मेरे निकलती दुआ सुनो दिल की

छलक गए है जो प्याले निगाह मिलते ही
यूँ ले रही है नज़र क्या रजा सुनो दिल की

ग़ज़ब हुनर जो लिए खेलते हो तुम दिल से
कभी कभी ही सही बेबफा सुनो दिल की

अगर मगर तो हमेशा बजूद में होगा
कभी तो "दीप" यूँ ही बेवजा सुनो दिल की

संदीप पटेल"दीप"

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 9, 2013 at 4:27pm — 7 Comments

सुन ले कायर पाकिस्तान

सुन ले कायर पाकिस्तान

नहीं झुकेगा हिन्दुस्तान



बात से पहले समझायेंगे

तुम क्या हो ये बतलायेंगे

भारत के वीरों का गहना 

संयम शांति जतलायेंगे 



अगर समझ फिर भी न पाया 

मारें थप्पड़ खींचें कान ....................... 



गीदड़ की न चाल चलो तुम 

छुप छुप कर न वार करो तुम 

शेरों से लड़ने के खातिर

कुछ हाथी तैयार करो तुम 



बच्चा बच्चा वीर यहाँ का

हमको है खुद पर अभिमान .................................



घुसपैठी को आज तजो…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 9, 2013 at 3:54pm — 7 Comments

वो दिन कितने प्यारे थे

वो दिन कितने प्यारे थे

गाँव गाँव और

शहर शहर में 

प्रेम पगे गलियारे थे ......

स्वार्थ नहीं

इक अपनापन था

परहित में

जीवन-यापन था

अमन चैन के

रंग में रंगे 

आलोकिक भुनसारे थे ..........

कोई बुराई

नहीं करता था 

अविश्वास

सदा मरता था 

दोस्त दोस्त से

आस लगाये 

राग द्वेष अंधियारे थे ............

इक होती थी

सबकी राय

कोई अपनी

नहीं चलाय

संग में

जब तब 

होती मस्ती …

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 5, 2013 at 3:30pm — 6 Comments

एक दिन तुम देखना

एक दिन तुम देखना 

एक दिन तुम देखना



खौफ और आतंक ऐसे

बढ़ रहा है आज कैसे

लाज लुटती राह में यूँ 

लगता अंधा राज जैसे 



संस्कृति के जो हैं भक्षक सब बनेंगे सरगना ...........................



मान मर्यादा मिटाई

नींव रस्मों की हिलाई

अपने में सीमित हुई है

आजकल की ये पढ़ाई



बदलो ये सब अब नहीं तो होगा खुद को कोसना ..............................



शून्य ही बस अंक होगा 

पोखरों में पंक होगा

शुष्क होंगे वन और पर्वत  …

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 4, 2013 at 3:58pm — 10 Comments

अधजल गगरी छलकत जाए

आधा सुन के खूब सुनाये 

अधजल गगरी छलकत जाए



धैर्य नहीं इक पल भी रखना

चाहे मूरख सब कुछ चखना

क्या है मीठा क्या है खारा

नहीं भा रहा उसे परखना



अंतर में रख घोर अन्धेरा

बाहर बाहर दीप जलाए....................



सुने नहीं वो बात बड़ों की

आंके बस औकात बड़ों की

दिन को देख के नहीं सोचता 

गुजरे कैसे रात बड़ों की 



बिन अनुभव के बड़ा न कोई 

कौन भला इसको समझाए ........................



जो चाहूँ मैं अभी बनालूं

कच्ची माटी ऐसे…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 3, 2013 at 3:41pm — 9 Comments

मुल्क की इस पाक माटी को मुबारक हो ये साल

मुल्क की इस पाक माटी को मुबारक हो ये साल

संग सी वीरों की छाती को मुबारक हो ये साल



चल पडा है कारवाँ अधिकार अपने मांगने

इस बगावत करती आंधी को मुबारक हो ये साल 



आग हर दिल में जला दी फूंक के डर का कफ़न 

हो चली रुखसत जो बेटी को मुबारक हो ये साल…



Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 1, 2013 at 4:00pm — 7 Comments

Monthly Archives

2017

2014

2013

2012

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
Sunday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service