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August 2017 Blog Posts

रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे

 

“बेटा एक बात कहूं क्या?”

 

“हाँ बोल न माँ, पर अपनी बहू के बारे में नहीं।“   

 

माँ चुप हो गयी, फिर बोली “बेटा, अपने से जुड़े हुए लोगों का महत्व समझना चाहिये, हमे देखना चाहिये की वो हमसे कितना प्यार करते हैं, हमे भी उनको उतना ही स्नेह और महत्व देना चाहिये, कभी-कभी हम अपने से स्नेह करने वालों से, चाहे वो कोई भी क्यों न हों, इस तरह का व्यवहार करने लग जाते हैं, जैसे ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ ।“

बेटा हो सकता है वो आपको, आपके इस तरह के उपेक्षापूर्ण…

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Added by Hari Prakash Dubey on August 1, 2017 at 9:02pm — 9 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
पहला क़दम ज़रूरी है .....

देखो मंज़िल से क़दमों की बस इतनी सी दूरी है

माना मुश्किल होता है पर पहला क़दम ज़रूरी है



पग-पग पर हम सही ग़लत चुन

अपना जीवन गढ़ते हैं

छोटे-छोटे लक्ष्य भेद कर

उसमें ख़ुशियाँ मढ़ते हैं

झूठा है हर एक बहाना झूठी हर मजबूरी है



आधे मन से अगर बड़े तो

बस भटकन ही पाएँगे

नहीं छँटेगा कभी धुँधलका

राहों में खो जाएँगे

जीत हार की बात व्यर्थ है कोशिश अगर अधूरी है



लक्ष्य अगर तय कर लें तो फिर

सच्ची लगन लगानी होगी

जिसमें मन दिन… Continue

Added by Dr.Prachi Singh on August 1, 2017 at 2:52pm — 3 Comments

ग़ज़ल -कायम रहा रुतबा तेरा

2212 2212 2212 2212



बस रात भर की बात थी , फिर भी रहा पहरा तेरा ।

ऐ चाँद तेरी बज़्म में कायम रहा रुतबा तेरा ।।



वो तीरगी जाती रही रोशन लगी हर शब मुझे ।

मेरे तसव्वुर में कभी जब अक्स ये उभरा तेरा ।।



टूटा हुआ तारा था इक हँसता रहा क्यूँ कहकशां ।

यूँ ही जमीं से देखता मैं रह गया लहज़ा तेरा ।।



देकर गई है मुफ़लिसी ,कुछ तज्रिबा भी कीमती ।

मुझको अभी तक याद है ,बख़्शा हुआ सदक़ा तेरा।।



है जिक्र तेरे हुस्न का बाकी कोई चर्चा नहीं ।

है… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on August 1, 2017 at 2:00pm — 10 Comments

दोहे

दोहे 
राजनीति   दलदल   यहाँ, मिट्टी  हुई पलीद।

मजहब  मजहब लड़ रहे, कहाँ  दिवाली ईद।।1।।



कहने   को  करवा  रहे,  ये  रोजा   इफ्तार।

मगर  दृष्टि  में  तैरता, वोटों  का  व्यापार।।2।।



बादल  अब  बरसे वहाँ, जहाँ बहुत सा नीर।

सूखी भू  तरसे  कृषक, बढ़ी  जा  रही  पीर।।3।।



सरकारी घन छा गए, रिमझिम पड़े…
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Added by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 1, 2017 at 1:00pm — 8 Comments

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