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Ghulam Kundanam
  • Male
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Male
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Vill- Jamuhar
Native Place
Jamuhar
Profession
Teacher
About me
Chairman (All Religions Servant Society)

Ghulam Kundanam's Blog

Ghazal

जमाने से चलती हवाओं का रूख मोड़ देंगे,

बदबू साफ़ कर उसमें सिर्फ सुगंध छोड़ देंगे.



मौसम भी अगर दगा दे हमसे रूठ जाता है,

बादल से हम अपने बाग़ को सीधे जोड़ देंगे.



कल तक जो मेरे राहों में कांटें बिछाती थी,

पलकें बिछाकर उसका गुरूर हम तोड़ देंगे.



औरों की मुस्कराहट ही हमारी ईमान होगी.

तुम्हें खुश रखने को, अपना जख्म छोड़ देंगे.



जमाना साथ देने के बजाय टांग खिंचेगी,

प्रेम का रस पिलाने को पत्थर निचोड़ देंगे.



दौड़ रही है जितनी गाड़ी… Continue

Posted on December 5, 2010 at 1:18am — 1 Comment

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At 11:01pm on April 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपको ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 10:46am on April 28, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 3:21pm on December 17, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 10:01pm on November 29, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

At 12:02am on November 27, 2010, Ratnesh Raman Pathak said…

At 10:10pm on November 25, 2010, Admin said…

At 10:09pm on November 25, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

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