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Dharmendra Kumar Yadav
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Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post कैसे सबका मोल चुकाऊँ?
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।  रचना को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।"
Sep 5, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post कैसे सबका मोल चुकाऊँ?
"आ. भाई धर्मेंन्द्र जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Sep 5, 2021
Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post कैसे सबका मोल चुकाऊँ?
"आदरणीय समर कबीर जी, प्रणाम। आपकी ‘पवन’ शब्द के बारे में टिप्पणी बिल्कुल सही है। अपने मन में मातॄ-भूमि के प्रति उपजे भाव की काव्यात्मक प्रस्तुति में आ रही बाधा को दूर करने हेतु ‘पवन’ के साथ ‘सुहानी’ विशेषण का…"
Aug 31, 2021
Samar kabeer commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post कैसे सबका मोल चुकाऊँ?
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार यादव जी आदाब,अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । 'प्राणवायु यह पवन सुहानी' इस पंक्ति में 'पवन' शब्द पुल्लिंग है, देखियेगा ।"
Aug 31, 2021
Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

कैसे सबका मोल चुकाऊँ?

सूरज किरणें देता जग को नदिया देती निर्मल पानी। पालन करती युगों-युगों से धरती ओढ़ चुनरिया धानी।शीतल छाया देता तरुवर प्राणवायु यह पवन सुहानी। फूल चमन को देते खुशबू परम सार संतों की बानी।उऋण हुए गुरु विद्या देकर निर्धन को धन देकर दानी। कैसे सबका मोल चुकाऊँ? दीन अकिंचन मैं अज्ञानी।हे चंडी! दे वर दे मुझको रार अगर दुश्मन ने ठानी। मातृ-भूमि के चरणों पर मैं अर्पण कर दूँ शीश भवानी।"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Aug 29, 2021
Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आ. भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर', सप्रेम नमस्कार। रचना को आपने सराहा इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।"
Aug 8, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आ. भाई धर्मेंद्र जी, अभिवादन। इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई ।"
Aug 8, 2021
Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आदरणीय समर कबीर जी, शुक्रिया। आपके सुझाव पर श्रद्धापूर्वक अमल करने का प्रयास करूँगा।"
Aug 8, 2021
Samar kabeer commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार यादव जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । कृपया मंच पर अपनी सक्रियता बनाएँ ।"
Aug 3, 2021
Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आप जैसे वरिष्ठ शायर द्वारा उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
Aug 2, 2021
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आदरणीय धर्मेंद्र कुमार यादव जी आदाब, सुंदर गीत लयबद्ध किया है आपने, बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
Aug 1, 2021
Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

एक सजनिया चली अकेली

संग न कोई सखी सहेली, रूप छुपाए लाजन से। एक सजनिया चली अकेली, मिलने अपने साजन से।मधुर मिलन की आस सँजोए, वह जब कदम बढ़ाती है। जल थल नभ की नीरवता से, आहट तम की आती है। चार पहर की कठिन डगरिया, पर इठलाती नाजन से। एक सजनिया चली अकेली, मिलने अपने साजन से।धवल चाँदनी बिखरी नभ में, खिली यामिनी धरती पर। बसंत बहार कहीं मल्हार, मधुर रागिनी जगती पर। आतुर हो बढ़ती वह जैसे, राधा मुरली बाजन से। एक सजनिया चली अकेली, मिलने अपने साजन से।नभ मंडल में बिखरे तारे, चाँद क्षितिज के पार चला। तम निकला झुरमुट से बाहर,…See More
Aug 1, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post तब जाकर नानी कहलाई
"आ. भाई धर्मेन्द्र जी, अच्छी समसामयिक रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Apr 29, 2020
नाथ सोनांचली commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post तब जाकर नानी कहलाई
"आद0 धर्मेंद्र कुमार यादव जी सादर अभिवादन। बढ़िया बाल कविता लिखी है आपने, बधाई स्वीकार कीजिये।"
Apr 29, 2020
Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

तब जाकर नानी कहलाई

नन्हीं बिटिया जग में आईबड़ी उदासी घर में छाई! सब के सब हैं चुपचाप मगर मैया की छाती भर आई।।जन्म दिया मैया कहलाई पर इक बात समझ ना आई नानी है या कोई मिसरी? माँ से भी मीठी कहलाई।।पहले बिटिया बनकर आई फिर बिटिया को जग में लाई माँ बनती जब, माँ की बिटिया तब जाकर नानी कहलाई।।"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Apr 28, 2020
Manoj Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post भूल गया मैं लिखना कविता
"VERY NICE POEM  KEEP IT UP !!!!!!! मन को छू गयी यह कविता  !!!!"
Apr 14, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Thane, Maharashtra
Native Place
Village- Soirai, Post-Baresta Kalan, District- Allahabad
Profession
Auditing
About me
Simple Person

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Dharmendra Kumar Yadav's Blog

कैसे सबका मोल चुकाऊँ?

सूरज किरणें देता जग को

नदिया देती निर्मल पानी।

पालन करती युगों-युगों से

धरती ओढ़ चुनरिया धानी।

शीतल छाया देता तरुवर

प्राणवायु यह पवन सुहानी।

फूल चमन को देते खुशबू

परम सार संतों की बानी।

उऋण हुए गुरु विद्या देकर

निर्धन को धन देकर दानी।

कैसे सबका मोल चुकाऊँ?

दीन अकिंचन मैं अज्ञानी।

हे चंडी! दे वर दे मुझको

रार अगर दुश्मन ने ठानी।

मातृ-भूमि के चरणों पर मैं

अर्पण कर दूँ शीश…

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Posted on August 29, 2021 at 2:38pm — 4 Comments

एक सजनिया चली अकेली

संग न कोई सखी सहेली,

रूप छुपाए लाजन से।

एक सजनिया चली अकेली,

मिलने अपने साजन से।

मधुर मिलन की आस सँजोए,

वह जब कदम बढ़ाती है।

जल थल नभ की नीरवता से,

आहट तम की आती है।

चार पहर की कठिन डगरिया,

पर इठलाती नाजन से।

एक सजनिया चली अकेली,

मिलने अपने साजन से।

धवल चाँदनी बिखरी नभ में,

खिली यामिनी धरती पर।

बसंत बहार कहीं मल्हार,

मधुर रागिनी जगती पर।

आतुर हो बढ़ती वह जैसे,

राधा मुरली बाजन से।…

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Posted on August 1, 2021 at 2:24pm — 6 Comments

तब जाकर नानी कहलाई

नन्हीं बिटिया जग में आई

बड़ी उदासी घर में छाई!
सब के सब हैं चुपचाप मगर
मैया की छाती भर आई।।

जन्म दिया मैया कहलाई
पर इक बात समझ ना आई
नानी है या कोई मिसरी?
माँ से भी मीठी कहलाई।।

पहले बिटिया बनकर आई
फिर बिटिया को जग में लाई
माँ बनती जब, माँ की बिटिया
तब जाकर नानी कहलाई।।

"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on April 26, 2020 at 3:30pm — 3 Comments

भूल गया मैं लिखना कविता

जब से तुमको, देखा सविता।

भूल गया मैं, लिखना कविता।।

भाता मुझको, पैदल चलना।

तुम चाहो, अंबर में उड़ना।

सैर-सपाटा, बँगला-गाड़ी।

फैशन नया, रेशमी साड़ी।

सखियाँ तेरी, इशिता शमिता।

भूल गया मैं, लिखना कविता।।

तुमको प्यारे, गहने जेवर।

नखरे न्यारे, तीखे तेवर।

होकर विह्वल, संयम खोती।

हँसती पल में, पल में रोती।

आँसू बहते, जैसे सरिता।

भूल गया मैं, लिखना कविता।।

नारी धर्म, निभाया तूने।

माँ बनकर,…

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Posted on April 14, 2020 at 4:30pm — 1 Comment

 
 
 

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