है भाषा का उपकार बड़ा
बना दिया हमको इनसान।
भाषा से भी बढ़ इक भाषा
जिसकी होती नहीं जबान।
प्यारा-सा नवजात कभी जब
इस दुनिया में आता है।
ना शब्दों का बोध अभी बस
रोता है चिल्लाता है।
उसके रोते ही माँ तत्क्षण
अपना क्षीर पिलाती है।
कैसे जननी की थपकी से
धुन लोरी की आती है।
कैसे लाती है इक ममता
शिशु के होठों पर मुस्कान।
भाषा से भी बढ़ इक भाषा
जिसकी होती नहीं जबान।
कितनी गहरी उनकी भाषा
बोल नहीं जो पाते…
Posted on August 19, 2026 at 12:45pm
सहित लखन अरु जानकी, विपिन गए रघुनाथ।
राम धाम तुलसी गए, अवधी अवध अनाथ।
भावार्थ:- प्रभु श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण जी के वनगमन के पश्चात जो दशा अवध (अयोध्या) और अवधी (अयोध्या वासियों) की हुई थी वही हालत गोस्वामी तुलसीदास जी के बैकुंठ धाम जाने के बाद अवध और अवधी (अवधी भाषा) की हो गई है।
"मौलिक व अप्रकाशित"
Posted on August 19, 2026 at 11:35am
माँ के आँचल में छुप जाते
हम सुनकर डाँट कभी जिनकी।
नव उमंग भर जाती मन में
चुपके से उनकी वह थपकी ।
उस पल जाना ‘प्रेम पिता का’
कितनी…
ContinuePosted on December 7, 2024 at 1:55pm — 1 Comment
मंदिर क्या है? इक पत्थर है
मस्जिद क्या है? इक पत्थर है
क्या है गिरिजाघर-गुरुद्वारा?
इक पत्थर है, इक पत्थर है।
रहता है जो हर पत्थर में
इक ईश्वर है, इक ईश्वर है।…
ContinuePosted on August 4, 2024 at 12:37pm
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