For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कैसे सबका मोल चुकाऊँ?

सूरज किरणें देता जग को
नदिया देती निर्मल पानी।
पालन करती युगों-युगों से
धरती ओढ़ चुनरिया धानी।

शीतल छाया देता तरुवर
प्राणवायु यह पवन सुहानी।
फूल चमन को देते खुशबू
परम सार संतों की बानी।

उऋण हुए गुरु विद्या देकर
निर्धन को धन देकर दानी।
कैसे सबका मोल चुकाऊँ?
दीन अकिंचन मैं अज्ञानी।

हे चंडी! दे वर दे मुझको
रार अगर दुश्मन ने ठानी।
मातृ-भूमि के चरणों पर मैं
अर्पण कर दूँ शीश भवानी।

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 376

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dharmendra Kumar Yadav on September 5, 2021 at 7:17pm

आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।  रचना को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 5, 2021 at 1:23pm

आ. भाई धर्मेंन्द्र जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Dharmendra Kumar Yadav on August 31, 2021 at 5:21pm

आदरणीय समर कबीर जी, प्रणाम। आपकी ‘पवन’ शब्द के बारे में टिप्पणी बिल्कुल सही है। अपने मन में मातॄ-भूमि के प्रति उपजे भाव की काव्यात्मक प्रस्तुति में आ रही बाधा को दूर करने हेतु ‘पवन’ के साथ ‘सुहानी’ विशेषण का प्रयोग मैंने उपरोक्त तथ्य की जानकारी के बावजूद किया है। यद्यपि पूर्व में भी कई जाने-माने कवि/गीतकार अपने भावों को व्यक्त करने के लिए ‘पवन’ या अन्य शब्दों के साथ जाने-अनजाने यह गलती कर चुके हैं। परंतु, अंततः यह एक दोष है जिसे मैं स्वीकार करता हूँ। सादर।

Comment by Samar kabeer on August 31, 2021 at 3:02pm

जनाब धर्मेन्द्र कुमार यादव जी आदाब,अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

'प्राणवायु यह पवन सुहानी'

इस पंक्ति में 'पवन' शब्द पुल्लिंग है, देखियेगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore posted a blog post

धक्का

निर्णय तुम्हारा निर्मलतुम जाना ...भले जानापर जब भी जानाअकस्मातपहेली बन कर न जानाकुछ कहकरबता कर…See More
23 minutes ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ० सौरभ भाई जी, जन्म दिवस की अशेष शुभकामनाएँ स्वीकार करें। आप यशस्वी हों शतायु हों।.जीवेत शरद: शतम्…"
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी. . . . . .

दोहा त्रयी. . . . . . ह्रदय सरोवर में भरा, इच्छाओं का नीर ।जितना इसमें डूबते, उतनी बढ़ती पीर…See More
11 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (जो भुला चुके हैं मुझको मेरी ज़िन्दगी बदल के)

1121 -  2122 - 1121 -  2122 जो भुला चुके हैं मुझको मेरी ज़िन्दगी बदल के वो रगों में दौड़ते हैं…See More
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आ. भाई सौरभ जी, आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ ।"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आपका सादर आभार, प्रतिभा जी"
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सादर आभार, आदरणीय अमीरुद्दीन साहब"
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सादर आभार, आदरणीय लक्ष्मण जी"
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आपका सादर आभार, आदरणीय विजय जी. "
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आदरणीय सुशील सरना जी का दोहा कहीं खारिज नहीं होने जा रहा है, आदरणीय नीलेश जी.  भ्रमकारी सुझाव…"
22 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"आदरणीय तेज वीर सिंह जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार । सादर नमन"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

(ग़ज़ल )...कहाँ मेरी ज़रूरत है

1222 - 1222 - 1222 - 1222फ़क़त रिश्ते जताने को यहाँ मेरी ज़रूरत है अज़ीज़ों को सिवा इसके कहाँ मेरी…See More
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service