For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय काव्य-रसिको,

सादर अभिवादन !

 

चित्र से काव्य तक छन्दोत्सव का यह आयोजन लगातार क्रम में इस बार पंचान्बेवाँ आयोजन है.   

 

आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ  

16 मार्च 2019 दिन शनिवार से 17 मार्च 2019 दिन रविवार तक
 
इस बार का छंद है - 

दोहा छंद  

हम आयोजन के अंतरगत शास्त्रीय छन्दों के शुद्ध रूप तथा इनपर आधारित गीत तथा नवगीत जैसे प्रयोगों को भी मान दे रहे हैं. छन्दों को आधार बनाते हुए प्रदत्त चित्र पर आधारित छन्द-रचना तो करनी ही है, दिये गये चित्र को आधार बनाते हुए छंद आधारित नवगीत या गीत या दोहा-ग़ज़ल या अन्य गेय (मात्रिक) रचनायें भी प्रस्तुत की जा सकती हैं.

साथ ही, रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है.    

केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जायेंगे 

दोहा छंद के मूलभूत नियमों से परिचित होने के लिए यहाँ क्लिक करें

जैसा कि विदित है, अन्यान्य छन्दों के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के  भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती है.

********************************************************

आयोजन सम्बन्धी नोट 

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो 

16 मार्च 2019 दिन शनिवार से 17 मार्च 2019 दिन रविवार तक, यानी दो दिनों के लिए, रचना-प्रस्तुति तथा टिप्पणियों के लिए खुला रहेगा.

 

अति आवश्यक सूचना :

  1. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
  2. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
  3. सदस्यगण संशोधन हेतु अनुरोध  करेंआयोजन की रचनाओं के संकलन के प्रकाशन के पोस्ट पर प्राप्त सुझावों के अनुसार संशोधन किया जायेगा.
  4. अपने पोस्ट या अपनी टिप्पणी को सदस्य स्वयं ही किसी हालत में डिलिट न करें। 
  5. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है.
  6. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.
  7. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग  करें. रोमन फ़ॉण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.
  8. रचनाओं को लेफ़्ट अलाइंड रखते हुए नॉन-बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें. अन्यथा आगे संकलन के क्रम में संग्रहकर्ता को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

छंदोत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के पिछ्ले अंकों को यहाँ पढ़ें ...

विशेष :

यदि आप अभी तक  www.openbooksonline.com  परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बार sign up कर लें.

 

मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम

Views: 811

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

दोहा छंद आधारित गीत

आज तिरंगे ने किया,
खुशबू का विस्तार
सरहद से लाई हवा,
रंगों की बौछार।

केसर घाटी में उड़ी,
जब बारूदी गंध।
माथे पर आतंक के,
अद्भुत लिखे निबन्ध।
उन्हीं क्षणों के शौर्य का,
आया है उपहार।

इस धरती के लाल तब,
बन जाते आकाश।
विषम घड़ी जब हो...सदा-
करते कष्ट विनाश।
वासंती चोला लिए,
देखो फागुन द्वार।

चित्र मनोरम प्रीत का,
सुख को करे विशाल।
कथ्य यहाँ पर मौन हैं,
रंग हुए वाचाल।
मुखरित रंगों ने किया,
मन झंकृत इस बार।

(मौलिक व अप्रकाशित)

केसर घाटी में उड़ी, 
जब बारूदी गंध।
माथे पर आतंक के, 
अद्भुत लिखे निबन्ध।
उन्हीं क्षणों के शौर्य का,
आया है उपहार।//  वाह अद्भुत भाव। प्रदत्त चित्र पर खूबसूरत गीत सृजन  हार्दिक बधाई आदरणीय मिथिलेश जी

आदरणीया  प्रतिभा जी, मेरे प्रयास के अनुमोदन हेतु आपका हार्दिक आभार। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर

आ. भाई मिथिलेश जी, चित्रानुरूप सुंदर दोहागीत से मंच का शुभारम्भ करने के लिए हार्दिक बधाई।

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, मेरे प्रयास के अनुमोदन एवं सराहना हेतु हार्दिक आभार। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर।

आदाब। इस बार की महाशिवरात्रि की तरह होली और ई़द भी हिंदुस्तानियों के लिए महत्वपूर्ण है। इस परिदृश्य में बेहतरीन दोहागीत।

//उन्हीं क्षणों के शौर्य का, आया है उपहार।//

वाह। हार्दिक बधाई आदरणीय मिथिलेश वामनकर साहिब।

आदरणीय उस्मानी जी, मेरे प्रयास की सराहना एवं प्रशंसा के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। हार्दिक आभार। सादर।

जनाब भाई मिथिलेश साहिब, प्रदत्त चित्र के अनुरूप सुंदर दोहा गीत हुआ है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l 

मेरे प्रयास की सराहना एवं प्रशंसा के लिए आपका हार्दिक आभार। बहुत-बहुत धन्यवाद। आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी। सादर।

आदरणीय मिथिलेश भाईजी

केसर घाटी के दृश्य , बारूदी गंध और होली के रंग, सब लेकर मुखरित है गीत दोहा छंद।  हृदय से बधाई इस चित्र को सार्थक करती इस प्रस्तुति के लिए।

तीसरे दोहे में .... विषम घड़ी को पहले रखने और इस धरती के लाल को दूसरी पंक्ति में रखने से कथ्य और स्पष्ट हो जाएगा।

सादर

 आदरणीय अखिलेश सर, आपने गीत के बंद में जो सुझाव दिया है वह  गीत के कथ्य को अर्थ विस्तार भी देता है ।मार्गदर्शन और सराहना के लिए हार्दिक आभार। बहुत-बहुत धन्यवाद । सादर।

आदरणीय भाईजी, मेरे इस छोटे से सुझाव को मान देने के लिए हृदय से आभार

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय समर कबीर साहब, इतनी कमज़ोर हुई मेरी रचना फिर भी आप बधाई देकर मेरा प्रोत्साहन बढ़ा रहे हैं।…"
1 hour ago
Manju Saxena posted a blog post

मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है

मेरा चेहरा मेरे जज़्बात का आईना है दिल पे गुज़री हुई हर बात का आईना है।देखते हो जो ये गुलनार तबस्सुम…See More
2 hours ago
Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय महेंद्र साहब, समर कबीर साहब का हर सुझाव मेरे लिए मान्य है। मैं प्रयासरत हूँ कि अच्छा कर…"
2 hours ago
Usha posted a blog post

ऐसी सादगी भरी शोहरत को सलाम। (अतुकांत कविता)

शोहरतों का हक़दार वही जो,न भूले ज़मीनी-हकीक़त, न आए जिसमें कोई अहम्,न छाए जिसपर बेअदबी का…See More
2 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

पानी पर चंद दोहे :

पानी पर चंद दोहे :प्यासी धरती पर नहीं , जब तक बरसे नीर। हलधर कैसे खेत की, हरित करे तकदीर।१ ।पानी…See More
2 hours ago
Usha commented on Usha's blog post उल्फत या कि नफ़रत। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय समर कबीर साहब, आपके सभी सुझाव सर मेरे लिए सुखद हैं। इसी प्रकार सीखकर बेहतर कर पाऊँगी। अभी…"
2 hours ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"बहुत ही सुन्दर क्षणिकाएँ कही हैं। हार्दिक बधाई, मित्र सुशील जी।"
13 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पानी पर चंद दोहे :
"आदरणीय  Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।आदरणीय आप सही…"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय  Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का…"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'
"अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है बेटी मुफ़लिस की खुले घर मे भी सो लेती है मेरे दामन से…"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हर इक सू से सदा ए सिसकियाँ अच्छी नहीं लगतीं ।सुना है इस वतन को बेटियां अच्छी नहीं लगतीं ।। न जाने…"
16 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service