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pratibha pande's Discussions (4,659)

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"*पका न पाती  रोटियाँ, भले  युद्ध की आगजला रही है नित्य पर, वह निर्धन का भाग।।//वाह..…"

pratibha pande replied Apr 19 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

34 Apr 19
Reply by Ashok Kumar Raktale

"गमलों में अब पेड़ हैं, पौधों के हैं हाट। लाखों घर बनते गए, वन उपवन सब काट॥//वाह.बहुत…"

pratibha pande replied Apr 19 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

34 Apr 19
Reply by Ashok Kumar Raktale

"लड़ने  संकट  से  हमें, रहना   है   तैयार। गला काटने गैस फिर, बने नहीं हथियार।।// जी ब…"

pratibha pande replied Apr 19 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

34 Apr 19
Reply by Ashok Kumar Raktale

"आदरणीय अशोक जी हार्दिक आभार इस उत्साहवर्धन के लिए "

pratibha pande replied Apr 19 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

34 Apr 19
Reply by Ashok Kumar Raktale

"आदरणीय अखिलेश जी हार्दिक आभार आपने त्रुटि की तरफ ध्यान दिलाया। ये पंक्ति इस तरह होन…"

pratibha pande replied Apr 19 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

34 Apr 19
Reply by Ashok Kumar Raktale

"प्रथम दोहे की पहली पंक्ति कृपया इस तरह पढ़ें  / बाँध साइकिल लकड़ियाँ, वृद्ध  चला घर…"

pratibha pande replied Apr 19 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

34 Apr 19
Reply by Ashok Kumar Raktale

"दोहा छंद _______ बाँध साइकिल लकड़ियाँ, जाता घर की ओर। ख़त्म हो गई गैस है,पेट मचाए श…"

pratibha pande replied Apr 19 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

34 Apr 19
Reply by Ashok Kumar Raktale

"हार्दिक आभार आदरणीय अजय जी।"

pratibha pande replied Mar 31 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

35 Mar 31
Reply by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

"हार्दिक आभार आदरणीय अखिलेश जी।"

pratibha pande replied Mar 31 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

35 Mar 31
Reply by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

"आदरणीय अजय जी बौर से फल तक के सफर को आपने बहुत संयत और सुन्दर शब्द दिए हैं। साथ में…"

pratibha pande replied Mar 31 to 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

35 Mar 31
Reply by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
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