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"हार्दिक आभार आदरणीय सौरभ जी। छंदों पर आपकी उपस्तिथि की प्रतीक्षा रहती है।"

pratibha pande replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"कनक हुआ है दाना-दाना, लुप्त हुई हरियाली//वाह //छोटी मटकी किसी श्रमिक की, तब भी प्या…"

pratibha pande replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"हार्दिक आभार आदरणीय अखिलेश जी उत्साहवर्धन सराहना और मार्गदर्शन के लिये। "

pratibha pande replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"प्रयास की सराहना के लिये हार्दिक आभार आदरणीय अशोक जी। विज्ञानी की मात्रा गणना में मु…"

pratibha pande replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"इस सृजन की सराहना के लिये हार्दिक आभार आदरणीय"

pratibha pande replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय समर कबीर जी सादर अभिवादन रचना पर आपकी उपस्तिथि सराहना और मार्गदर्शन हमेशा उत्…"

pratibha pande replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय चेतन प्रकाश जी प्रदत्त चित्र पर सुन्दर सार छंद रचे हैं आपने  हार्दिक बधाई"

pratibha pande replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी वाह  वाह चित्र से जुड़े सभी आयाम समेटते हुए आपने बहुत सुन…"

pratibha pande replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय दयाराम मेठानी जी सुन्दर सार छंदों का सृजन किया है आपने। हार्दिक बधाई"

pratibha pande replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

"आदरणीय अखिलेश जी चित्र के भावों को समेटते हुए बहुत सुन्दर छन्न पकैया रचे है आपने। हा…"

pratibha pande replied Apr 24 to "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132

62 Apr 25
Reply by Saurabh Pandey

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"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार। अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। भूलवश अरकान गलत…"
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"आदरणीय गुमनाम पिथौरागढ़ी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
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