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भोजपुरी साहित्य Discussions (250)

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अब का होई नेता जी

मन अशांत चमचन के , परेशान पेपर पढ़ पढ़ के , दस केस अदालत में बा , सौ दबल बा थाना में , अगिला चुनाव बा आवे वाला , हो जाइ सब गरबर झाला , रउआ अय…

Started by Rash Bihari Ravi

3 May 30, 2014
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

भोजपुरी गीत

गीत दिनवा ओराये लागल रतिया हेराए लागल बुते लागल असरा क. बरल. तु दियना कह. अइब. कबले, लागे मोर जिय ना का ओही देसवा मा- बाटे, जे बिलमि गइल. म…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

0 May 15, 2014

मुख्य प्रबंधक

भोजपुरी लघुकथा : मन्थरा (गणेश जी बागी)

गवना के एक साल बाद गोदी मे चान नियन बेटी लेके रूपा पहिला हाली नईहर आइल बाड़ी, घर मे तेवहार जइसन माहौल बा, अँगना मे घर के सभे लोग उनुका के घ…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

13 Mar 12, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

मुख्य प्रबंधक

बात जवन भुलाला ना (सरस्वती पूजा पर विशेष)

बोल बोल कागा, तोरे सगुनवा नीक लागा  ..... चिकनी चमेली आ फेविकोल के बीचे जब "कागा" सुनाइल त हम अपना के रोक ना सकनी आ टेक्टर पर छोट-छोट लइकन…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

9 Feb 5, 2014
Reply by Shyam Narain Verma

सदस्य टीम प्रबंधन

दशहरा : भोजपुरी दोहे // -- सौरभ

जोन्ही भर के जोर पर, चिहुँकल छनकि अन्हार ढिबरी भर के आस ले, मनवाँ सबुर सम्हार रहि-रहि मन अकुतात बा, दुअरा लखन-लकीर  सीता सहमसु चूल्हि…

Started by Saurabh Pandey

19 Feb 2, 2014
Reply by Dr. Anil Mishra

बिना माई के ई संसार ना चली ।

बिना माई के ई संसार ना चली । कइसे कहल बबुआ , तोहरा से भार ना चली । बड़ कइनी तोहरा के दुधवा पीयाके । छाती से लगा के रखनी दुखवा भुलाके ।…

Started by Shyam Narain Verma

0 Dec 24, 2013

लहरे तिरंगा झंडा अपना देश के शान |

लहरे    तिरंगा   झंडा   अपना  देश  के शान | आजादी   के चाहत में   केतने  दिहले जान | स्वतंता संग्राम के देख   दर्द भरी    कहानी | भेद …

Started by Shyam Narain Verma

1 Dec 1, 2013
Reply by Neelam Upadhyaya

हाथे मेंहदी

हाथे मेंहदी चूड़ी कगनावा,     पांवे पइलीया डारी के चलली गोरी पिया संगवा, नईहर नगरीया छोरी के, माई रोवे, बाबू रोवे  रोवे दुलरा             भ…

Started by Akhand Gahmari

1 Nov 26, 2013
Reply by Shyam Narain Verma

सुन शहरी बाबू जा देख गाँव के नज़ारा |

सुन  शहरी  बाबू जा देख गाँव के   नज़ारा | देखि    बताव   कईसे    होई तोहार    गुज़ारा |  पहिरेल रंग   विरंगे   ही  नया        परिधान | शह…

Started by Shyam Narain Verma

2 Nov 8, 2013
Reply by Meena Pathak

मुख्य प्रबंधक

भोजपुरी हास्य घनाक्षरी

छंद विधा : घनाक्षरी  छंद प्रकार : वर्णिक  विधान : [4 x (8+8+8+7)] **** सात साल के छोटुआ, माने नहीं आवऽत बा     गारी पारि-पारि देखs, मास्टरे…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

6 Nov 8, 2013
Reply by Meena Pathak

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Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
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"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
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जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
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Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
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"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

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Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

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Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
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"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
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Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
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सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
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