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भोजपुरी साहित्य Discussions (248)

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मुख्य प्रबंधक

भोजपुरी लघुकथा : मन्थरा (गणेश जी बागी)

गवना के एक साल बाद गोदी मे चान नियन बेटी लेके रूपा पहिला हाली नईहर आइल बाड़ी, घर मे तेवहार जइसन माहौल बा, अँगना मे घर के सभे लोग उनुका के घ…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

13 Mar 12, 2014
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

मुख्य प्रबंधक

बात जवन भुलाला ना (सरस्वती पूजा पर विशेष)

बोल बोल कागा, तोरे सगुनवा नीक लागा  ..... चिकनी चमेली आ फेविकोल के बीचे जब "कागा" सुनाइल त हम अपना के रोक ना सकनी आ टेक्टर पर छोट-छोट लइकन…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

9 Feb 5, 2014
Reply by Shyam Narain Verma

सदस्य टीम प्रबंधन

दशहरा : भोजपुरी दोहे // -- सौरभ

जोन्ही भर के जोर पर, चिहुँकल छनकि अन्हार ढिबरी भर के आस ले, मनवाँ सबुर सम्हार रहि-रहि मन अकुतात बा, दुअरा लखन-लकीर  सीता सहमसु चूल्हि…

Started by Saurabh Pandey

19 Feb 2, 2014
Reply by Dr. Anil Mishra

बिना माई के ई संसार ना चली ।

बिना माई के ई संसार ना चली । कइसे कहल बबुआ , तोहरा से भार ना चली । बड़ कइनी तोहरा के दुधवा पीयाके । छाती से लगा के रखनी दुखवा भुलाके ।…

Started by Shyam Narain Verma

0 Dec 24, 2013

लहरे तिरंगा झंडा अपना देश के शान |

लहरे    तिरंगा   झंडा   अपना  देश  के शान | आजादी   के चाहत में   केतने  दिहले जान | स्वतंता संग्राम के देख   दर्द भरी    कहानी | भेद …

Started by Shyam Narain Verma

1 Dec 1, 2013
Reply by Neelam Upadhyaya

हाथे मेंहदी

हाथे मेंहदी चूड़ी कगनावा,     पांवे पइलीया डारी के चलली गोरी पिया संगवा, नईहर नगरीया छोरी के, माई रोवे, बाबू रोवे  रोवे दुलरा             भ…

Started by Akhand Gahmari

1 Nov 26, 2013
Reply by Shyam Narain Verma

सुन शहरी बाबू जा देख गाँव के नज़ारा |

सुन  शहरी  बाबू जा देख गाँव के   नज़ारा | देखि    बताव   कईसे    होई तोहार    गुज़ारा |  पहिरेल रंग   विरंगे   ही  नया        परिधान | शह…

Started by Shyam Narain Verma

2 Nov 8, 2013
Reply by Meena Pathak

मुख्य प्रबंधक

भोजपुरी हास्य घनाक्षरी

छंद विधा : घनाक्षरी  छंद प्रकार : वर्णिक  विधान : [4 x (8+8+8+7)] **** सात साल के छोटुआ, माने नहीं आवऽत बा     गारी पारि-पारि देखs, मास्टरे…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

6 Nov 8, 2013
Reply by Meena Pathak

सावनी गीत

सावनी गीत                             सावन क आयल महीनवा हो   हियरा हुलसाईल   चनवा क जईसे चननिया हो    अड.गना उतराईल  ! १ – पण्डित पाहुन अग…

Started by mrs manjari pandey

5 Oct 18, 2013
Reply by रामनाथ 'शोधार्थी'

उपदेश बतावेलन

गुरु के बिना सबके संसार बा अधूरा । जबे मीलिहें गुरुजी हो जाई पूरा । अँगूरी पकड़ी लिखे पढ़े सिखावेलन , मीठी बतिया से दिल बहलावेलन । सब के…

Started by Shyam Narain Verma

3 Oct 4, 2013
Reply by Saurabh Pandey

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
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"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
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"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
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"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
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