For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल नूर की- दर्द है तो कभी दवा है ये


दर्द है तो कभी दवा है ये,
इश्क़ है या कि मोजज़ा है ये.
.
जो बिख़रने का सिलसिला है ये
ख़ुशबू होने ही की सज़ा है ये.
.
हम जो रोते हैं कुफ़्र होता है
मज़हब-ए-इश्क़ में मना है ये.
.
अपनी ताक़त को वो समझता है  
हुस्न के साथ मसअला है ये.
.
ख़त भला तेरा मैं जलाऊँगा?
आँसुओं से भभक गया  है ये.
.
हम तो फिरऔन इसको कहते हैं
ये समझता रहे ख़ुदा है ये. 
.
ग़म यहीं है यहीं कहीं होगा
तेरे देखे से छुप गया है ये.
.
निलेश "नूर"
मौलिक / अप्रकाशित 

Views: 773

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on January 21, 2023 at 1:20pm

धन्यवाद आ. गुरप्रीत जी.
आप की टिप्पणी शायद पुन: ग़ज़लों की तरफ प्रवृत्त कर सके 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on January 21, 2023 at 1:19pm

धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी 

Comment by Gurpreet Singh jammu on January 20, 2023 at 6:13pm

आदरणीय निलेश सर जी। आपकी यह ग़ज़ल आज पढ़ी। आपकी ग़ज़ल का बहुत समय से इंतजार था। सच में इंतजार का फल मीठा होता है। किस शेर का जिक्र करें। सभी अशआर एक से बढ़कर एक। आखरी शेर तो उफ्फ जानलेवा है।

और फिर ये। 

हम जो रोते हैं कुफ़्र होता है
मज़हब-ए-इश्क़ में मना है ये 

जो बिख़रने का सिलसिला है ये
ख़ुशबू होने ही की सज़ा है ये.
.
अपनी ताक़त को वो समझता है  
हुस्न के साथ मसअला है ये.
.

वाह सर जी आपकी सोच का दायरा कहां कहां तक फैला है।

इस बहुत खुबसूरत और ग़ज़ल कहने के लिए प्रेरित करने वाली ग़ज़ल के लिए दिल से दाद।

 

 

 

 

 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 9, 2022 at 6:56pm

आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 9, 2022 at 11:42am

धन्यवाद आ. महेंद्र जी,
मना पर विस्तृत जवाब नीचे कमेंट में है ..
सादर 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 9, 2022 at 11:42am

धन्यवाद आ. बृजेश जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 9, 2022 at 11:41am

आ. रवि जी,

ग़ज़ल पर आने का शुक्रिया.. समर सर की बात से कोई इनकार नहीं है लेकिन भाषा जिस तरह एवोल्व होती है मैं भी उसी तरह के शब्द इस्तेमाल करता हूँ.. पूरा उर्दू साहित्य स्कूल को इस्कूल पढ़ कर फूला नहीं समाता है .. पत्थर और मंदिर को एक काफ़िये में बाँधता है ...सुधार की आवश्यकता वहां है..मैं अगर मना को मना लिख रहा हूँ तो यह जानते हुए लिख रहा हूँ कि विरोध होगा क्यूँ कि 99% हिन्दी समझने वाले कभी मना को मनअ नहीं पढ़ेंगे..
संस्कृत शब्द तृष्णा अगर तिश्ना हो सकता है तो मना को मना लिखने से कौन रोक सकता है ??

आभार 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 9, 2022 at 11:35am

धन्यवाद आ. चेतन प्रकाश साहब ..
कार्य कि व्यस्तता मुशायरे में भाग नहीं लेने दे रही. उम्मीद है अगली बार आ सकूं 
आभार 

Comment by Mahendra Kumar on October 6, 2022 at 8:45am

आ. निलेश जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। "मन'अ" के सन्दर्भ में मैं आ. समर सर से सहमत हूँ। इस पर आ.रवि भसीन जी ने मज़बूत तर्क रखा है। पूर्व में मैंने भी कई शब्दों को उनके ग़लत रूप में बरता है पर आ. समर सर के टोकने के बाद उन्हें बदल दिया या ख़ारिज कर दिया। विचार कीजिएगा। सादर।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 4, 2022 at 8:21pm

बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय नीलेश जी...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-125 (आत्मसम्मान)
"सादर नमस्कार। हार्दिक स्वागत आदरणीय दयाराम मेठानी साहिब।  आज की महत्वपूर्ण विषय पर गोष्ठी का…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शेष रखने कुटी हम तुले रात भर -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई गिरिराज जी , सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शेष रखने कुटी हम तुले रात भर -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ.भाई आजी तमाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
9 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-125 (आत्मसम्मान)
"विषय - आत्म सम्मान शीर्षक - गहरी चोट नीरज एक 14 वर्षीय बालक था। वह शहर के विख्यात वकील धर्म नारायण…"
10 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . .

कुंडलिया. . .चमकी चाँदी  केश  में, कहे उम्र  का खेल । स्याह केश  लौटें  नहीं, खूब   लगाओ  तेल ।…See More
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post भादों की बारिश
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी लघुकविता का मामला समझ में नहीं आ रहा. आपकी पिछ्ली रचना पर भी मैंने…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज भाईजी, आपकी प्रस्तुति का यह लिहाज इसलिए पसंद नहीं आया कि यह रचना आपकी प्रिया विधा…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"आदरणीय सुशील सरनाजी, आपकी कुण्डलिया छंद की विषयवस्तु रोचक ही नहीं, व्यापक भी है. यह आयुबोध अक्सर…"
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Aazi Tamaam's blog post तरही ग़ज़ल: इस 'अदालत में ये क़ातिल सच ही फ़रमावेंगे क्या
"आदरणीय आजी तमाम भाई, आपकी प्रस्तुति पर आ कर पुरानी हिंदी से आवेंगे-जावेंगे वाले क्रिया-विषेषण से…"
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ
"आदरणीय सुशील सरनाजी, आपके अनुमोदन के लिए हार्दिक आभार"
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ
"वाह आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी एक अलग विषय पर बेहतरीन सार्थक ग़ज़ल का सृजन हुआ है । हार्दिक बधाई…"
yesterday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service