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गुनाह होना आम हो गया - डॉo विजय शंकर

वो गुनाह को पनाह देते रहे
वो पनपता रहा , वो मौज करते रहे .
गुनाह होना रोज का काम हो गया
ऐसा काम , कि बस आम हो गया ,
जब चाहे , जहां हो जाये ,
कौन जानें , कब , कहाँ हो जाये .
हालात ये हैं कि अब लोग चौंकते नहीं ,
कहीं , कुछ भी , हो जाए बोलते नहीं ,
कहीं , किसी से , कुछ पूछतें नहीं
उस तरफ , उफ्फ … देखते नहीं ,
ये हालात हैं , जो शर्मिन्दा कभी हुए नहीं ,
जब कि गुनाह खुद बेइंतहा शर्मिन्दा है ....
कि लोगो में उसके लिए कोई खौफ नहीं है
इस कदर अपनी इतनी बेइज्जती देख कर .

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Dr. Vijai Shanker on November 8, 2014 at 10:29pm

आपने पंक्तियों को समय दिया, मान दिया , आभार।  बधाई के लिए धन्यवाद आदरणीय लक्षमण लाड़ीवाला जी। 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 8, 2014 at 6:27pm
गुनाह होना रोज का काम हो गया
ऐसा काम, कि बस आम हो गया
हालात ये हैं कि अब लोग चौंकते नहीं,
कहीं, कुछ भी, हो जाए बोलते नहीं, --- तभी तो होंसले बुलंद है,कहाँ किसी को रंज है |- सार्थक रचना के लिए बधाई
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 8, 2014 at 4:17pm

प्रिय जीतेन्द्र  जी आपकी प्रतिक्रिया  अर्थपूर्ण होती है।   बधाई के लिए ह्रदय से धन्यवाद।  

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 8, 2014 at 4:15pm
आदरणीय अरुण कुमार निगम जी आपकी बधाई के लिए ह्रदय से धन्यवाद।
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 8, 2014 at 9:35am

सच कहा आपने, कहीं कोई खौफ नही है गुनाहों के प्रति. बहुत सुंदर वास्तविक रचना , आदरणीय डा.विजय जी. हार्दिक बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on November 7, 2014 at 10:56pm
आदरणीय विजय शंकर जी, सुन्दर रचना के लिये बधाई...
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 7, 2014 at 9:44pm
रचना की प्रशस्ति के लिए ,आभार , आदरणीय महर्षि त्रिपाठी जी।आपकी सद्भावनाओं हेतु सादर धन्यवाद।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 7, 2014 at 9:42pm
आप को रचना पसंद आई ,आभार , आदरणीय गोपाल नारायण जी। सद्भावनाओं हेतु सादर धन्यवाद।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 7, 2014 at 9:40pm
आप को रचना पसंद आई ,आभार , आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी। बधाई हेतु सादर धन्यवाद।
Comment by maharshi tripathi on November 7, 2014 at 8:10pm
बहुत ही खूबसूरत और यथार्थ प्रस्तुति |सर

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