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इच्छायें और चाहतें -- डॉo विजय शंकर

चाहतें इतनी ,
ये मिल जाता ,
वो मिल जाता ,
जो चाहा वो मिल जाता ,
कितना अच्छा हो जाता ।
चाहतें ही चाहतें
इच्छाओं की क्या कहें ,
पनपती ही नहीं ,
चाहतें हैं कि कम होती ही नहीं ,
इच्छायें है कि जनम लेतीं ही नहीं ,
इच्छा को इच्छा - शक्ति चाहिये ,
तभी फलीभूत होती है ,
चाहतें स्वयं सशक्त होती हैं।
बढ़ती हैं, अपने आप ,
देख के दूसरों को बढ़ती हैं ,
इच्छाएं नहीं बढ़ती हैं ,
स्वयं तो बिकुल नहीं ,
इच्छा को वहां भी शक्ति चाहिये ,
चाहतें तो उत्कण्ठा होती हैं ।
उनकीं भी चाहतें हैं ,
बड़ी-बड़ी , गहरी-गहरी , तीव्र वाली,
वो उनकीं पूर्ति में लगे रहते हैं, पूरे मनोयोग से,
इच्छाओं के लिए वे जन-समुदाय को देखतें हैं ,
चाहते हैं ,जन-समुदाय इच्छा पैदा करे,
देश के लिए कुछ करे,
इच्छा - शक्ति विकसित करे ,
देश का कल्याण करे ,
जन-समुदाय की इच्छा क्या माने रखती है,
पांच वर्ष पर मुखरित होती है ,
बाकी ,उनकीं चाहतों के नीचे दबी रहती है,
इच्छा को शक्ति मिले कहाँ से ,
जब उनकी नीयत ही नहीं होती है ॥

मौलिक एवं अप्रकाशित.
डा० विजय शंकर

Views: 570

Comment

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Comment by Dr. Vijai Shanker on March 24, 2015 at 11:18pm
प्रिय मिथिलेश जी , आपकी सकारात्मक स्वीकृति के लिए आभार , बस एक प्रयास है।कभी कभी कर लेता हूँ। आपकी शुभकामनाओं के लिय ह्रदय से बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद।
Comment by Dr. Vijai Shanker on March 24, 2015 at 11:16pm
आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी , आपकी स्वीकृति के लिए बहुत बहुत आभार , बस एक प्रयास है। आपकी शुभकामनाओं के लिय ह्रदय से बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद।
Comment by Dr. Vijai Shanker on March 24, 2015 at 10:37pm
आदरणीय श्याम मठपाल जी , आपकी पकड़ को नमन , बस एक प्रयास है , करता रहता हूँ। आपकी शुभकामनाओं के लिय ह्रदय से बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 24, 2015 at 8:31pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर आपके सकारात्मक विचार और सीधा प्रहार सदैव दमदार होते है ... अच्छी प्रस्तुति पर बधाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 24, 2015 at 5:27pm

आ० विजय सर !

सुन्दर विचार .

उनकीं भी चाहतें हैं ,
बड़ी-बड़ी , गहरी-गहरी , तीव्र वाली,
वो उनकीं पूर्ति में लगे रहते हैं, पूरे मनोयोग से,
इच्छाओं के लिए वे जन-समुदाय को देखतें हैं ,
चाहते हैं ,जन-समुदाय इच्छा पैदा करे,
देश के लिए कुछ करे,
इच्छा - शक्ति विकसित करे ,
देश का कल्याण करे ,

Comment by Shyam Mathpal on March 24, 2015 at 11:19am

 आ. डा० विजय शंकर जी ,

सुंदर रचना के लिए बधाई . Aap hamesh kuch naya sochte hain -likhte hai.

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