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मधुमालती छंद ( मात्रा विधान - 7-7 , 7-7)

ऐसा हुआ , बारात में
लड़का नहीँ , आया अभी

बोले पिता , बेटा कहे
पैसा अभी , मिला नहीं

शादी नहीँ , होगी अभी
मिला नहीं , दहेज अभी ।

बेटी कहे , देना नहीं
पैसा बुरा , जले चिता

होती नहीं , बेटी बुरी
चलती नही , चालें कभी

पगड़ी भली , लागे मुझे
पिता बोज़ क्यों , माने मुझे

बेटी कभी , चाहे नहीँ
अपमान नहीँ , करे कभी ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by TEJ VEER SINGH on March 17, 2017 at 10:32am

हार्दिक बधाई आदरणीय कल्पना जी।बेहतरीन प्रयास।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on March 17, 2017 at 10:14am
Aadarniya Ravi sir aapke vishwash par khari utar sakun chahti hoon yeh main . Prayas karungi . sadar.
Comment by Ravi Shukla on March 17, 2017 at 10:09am

आदरणीया कल्‍पना जी छंद पर प्रयास का स्‍वागत है आगे और भी अच्‍छे छंद रचेंगी , इसका भी पूर्ण विश्‍वास है आदरणीय रक्‍ताले जी ने भी स्‍पष्‍ट कर दिया है । इसी पर अभ्‍यास करके इसे संशोधित करें । आपके प्रयास के लिये बहुत बहुत बधाई, सादर ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on March 16, 2017 at 10:36pm
Ji sir .Pratham Prayas tha.khsama chahti hoon. Galtiyan hui hai.sadar.
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on March 16, 2017 at 10:30pm
आदरणीया कल्पना दीदी,मधुमालती छ्न्द पर आपका प्रयास सराहनीय है।बहुत-बहुत बधाई आपको।दीदी,छ्न्द के शिल्प अनुसार शायद चार पंक्तियों का छ्न्द होता है,दो-दो पंक्तियों में तुकान्तता,होती है।
प्रत्येक चरण 7 मात्राएँ।एक पंक्ति 14 मात्राएँ।
मैंने इस छ्न्द के शिल्प को इस प्रकार याद करने का प्रयास किया था:
मधुमालती ,मधुमालती(2212,2212)=7,7
मधुमालती ,मधुमालती(2212,2212)=7,7..आदि
सादर
Comment by Ashok Kumar Raktale on March 16, 2017 at 8:55pm

आदरणीया कल्पना भट्ट जी सादर, मधुमालती छंद परअच्छा प्रयास हुआ है. फिरभी यदि सारे पद गिन लें तो यह साढे तीन छंद होते हैं.

कई जगह असावधानी से छह मात्राएँ ही रह गई हैं. देख लें.

आपके कथ्य पर ही एक छंद का प्रयास है. सादर.

ऐसा हुआ, बारात में , सारे लगे थे बात में |

पैसा नहीं, पाया अभी, दुलहा नहीं आया तभी ||

Comment by Mohammed Arif on March 16, 2017 at 6:01pm
आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब, बेटी सशक्तिकरण, दहेज प्रथा के विरोध को प्रदर्शित करते बेहतरीन मधुमालती छंद लिखें हैं आपने । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । पूछना चाहूँगा कि क्या-"पिता बोझ क्यों,माने मुझे"तथा "अपमान नहीं,करे कभी" में मात्रिक विधान सही है । मुझे मात्रा बढ़ी नज़र आ रही है । सादर....।

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