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पधार गए हो नए साल जो

पधार गए हो नए साल जो
खुश रहो औ ख़ुश रहने दो
आओ जीमो मौज मनाओ
जो जमा हुआ वो बहने दो

पथ भी रहें पंथी भी रहें
राहें भी दुश्वार न हों
सुरों मे गीत रहें न रहें
चौराहों पर चीत्कार न हों

विधान रहें विद्वान कहें
कान भी सुनने वाले हों
श्वेद रहें खलिहान रहें
हाथों के मुंह निवाले हों

सरहद पर रेखा बनी रहे
म्यान बंद तलवारें हों
रंग तितली के लहराएँ
बन्द सभी ललकारें हों

पधार गए हो नए साल जो
खुश रहो औ ख़ुश रहने दो
आओ जीमो मौज मनाओ
जो जमा हुआ वो बहने दो

मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment

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Comment by vijay nikore on January 9, 2020 at 7:05am

रचना अच्छी लगी। बधाई, आदरणीया अमिता जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 6, 2020 at 4:34pm

आ. अमिता जी, नववर्ष पर अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by amita tiwari on January 5, 2020 at 12:24am

मान्य सुरेन्द्र जी 

नव 2020 शुभ रहे

जीमना एक देशज शब्द है जिसका अर्थ (खाइये ) आतिथ्य के लिए प्रयोग किया जाता है 

सादर 

अमिता 

Comment by नाथ सोनांचली on January 4, 2020 at 4:43pm

आद0 अमिता तिवारी जी सादर अभिवादन। बढ़िया सृजन नववर्ष पर,,बधाई स्वीकार कीजिए।

जीमो का आशय समझ नहीं पाया।

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