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1-
जितना जब भी जो बचा, खाया सबके बाद।
फिर भी उसने की नहीं, जीवनभर फरियाद।।
जीवनभर फरियाद, नहीं करती यह नारी।
किंतु वृद्ध असहाय, वही अपनों से हारी।।
कहते कवि हरिओम,ध्यान रखना बस इतना।
माँ का प्रेम अनंत, गहन सागर के जितना।।
2-
जिनके जीवन में करे, माँ खुशियाँ अपलोड।
वृद्धावस्था में वही, बदल रहे हैं मोड।।
बदल रहे हैं मोड, मगर माँ तो माँ होती।
करके उनको याद, बैठ आश्रम में रोती।।
कोई कर दे क्लीन, वायरस अब तो इनके।
माँ ने कर अपडेट, मोड बदले हैं जिनके।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
#हरिओम श्रीवास्तव#

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 31, 2019 at 6:52pm

आदाब। दोनों बेहतरीन भावपूर्ण व संदेशवाहक कुण्डलिया छंदों के लिए बहुत-बहुत बधाई आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव साहिब।

Comment by Samar kabeer on October 31, 2019 at 3:02pm

जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छे कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 30, 2019 at 3:42pm

सुंदर कुण्डलिया छंद के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय हरिओम श्रीवस्तव जी | 

//जीवनभर फरियाद, नहीं करती यह नारी।
किंतु वृद्ध असहाय, वही अपनों से हारी।।//  बहुत खूब| भावपूर्ण रचना हुई है जिसके लिए पुनः बधाई \

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