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बौना आदमी - लघुकथा -

बौना आदमी - लघुकथा -

रहीम ने अपने लंबे कुर्ते की झोली में ढेर सारे गेंहू लेकर जैसे ही घर की देहरी पर क़दम रखा, उसकी अम्मी की तेज़ नज़रों में पकड़ा गया,"रहीम यह क्या है तुम्हारे कुर्ते की झोली में?"

"अम्मीजी, इसमें गेंहू हैं।"

"गेंहू कहाँ से मिले तुम्हें?"

"अम्मीजी,चौधरी काका के खलिहान से उनकी गेंहू की फ़सल बैलगाड़ी से घर लाई जा रही थी।उनकी बोरियों में किसी बोरी में छेद रहा होगा तो उसमें से गेंहू नीचे जमीन पर गिरते जा रहे थे।मैं उस बैलगाड़ी के पीछे आ रहा था।सो मैं वह उठा लाया।"

"तो क्या तुम्हें चौधरीजी  ने ऐसा करने को बोला था?"

"नहीं अम्मी जी, उन्हें तो यह पता भी नहीं था कि इस तरह गेंहू गिर रहे हैं।"

"तो फिर तुम यह गेंहू अपने घर क्यों ले आये? कल को चौधरी को पता चला तो।तुम तो चौधरी जी की आदत और नीयत से अच्छी तरह वाक़िफ़ हो|"

"अरे वाह अम्मीजी, मैं पूरे दो घंटे इस तपती दोपहरी में गेंहू का एक एक दाना बीन कर लाया और आप उल्टा मुझे ही डाँट रही हो।"

"बेटा, किसी और की चीज़ उसकी इज़ाज़त के बिना उठा लाना गलत है।भले ही वह ज़मीन पर पड़ी हो।"

"तो क्या अब इस गेंहूं को वहीं वापस डाल आऊँ?"

"नहीं बेटा, उससे क्या लाभ होगा।मेरे विचार से इसे चौधरी जी को वापस दे आओ।"

"अम्मीजी, आप जानती हो कि चौधरी जी एक गुस्से बाज़ और झगड़ालू किस्म के आदमी है।दस तरह के सवाल करेंगे।सारा गाँव उनसे डरता है|"

"बेटा, तुमने कुछ गलत नहीं किया तो डर किस बात का? जाओ दे आओ उनके गेंहू।"

 रहीम अपनी अम्मी की हिदायत के मुताबिक वह गेंहू लेकर चौधरी जी के घर पहुंचा,"चौधरी काका,यह आपके गेंहू?"

"हमारे गेंहू।मैं कुछ समझा नहीं रहीम?"

 रहीम ने चौधरी जी को पूरा किस्सा सुनाया तो चौधरी जी दंग रह गये।

पहली बात तो यह कि चौधरी का खलिहान उनके घर से लगभग एक  किलोमीटर दूर था।इतनी तेज़ धूप में आठ साल के बच्चे द्वारा एक एक दाना गेंहू बीन कर लाना, बेहद कठिन और हौसले का कार्य था।उसके बाद गाँव के सबसे गरीब परिवार की महिला द्वारा ऐसा व्यवहार चकित कर देने वाला था।चौधरी जी यह निश्चित नहीं कर पा रहे थे कि वह क्या उत्तर दें ।चौधरी जी कुछ कहते उससे पहले ही रहीम झोली में से गेंहू चौधरी की देहलीज़ पर पलट कर जा चुका था।चौधरी जैसे दंभी और घमंडी इंसान के लिये यह एक करारा तमाचा था।एक छोटे से बच्चे ने उन्हें बौना साबित कर दिया था।

मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on June 14, 2019 at 12:37pm

हार्दिक आभार आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on June 14, 2019 at 12:36pm

हार्दिक आभार आदरणीय विनय कुमार जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on June 14, 2019 at 12:36pm

हार्दिक आभार आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान साहब जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 23, 2019 at 6:21am

आ. भाई तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। सुंदर- संदेशपरक लघुकथा पर ढेरों बधाई ।

Comment by विनय कुमार on May 21, 2019 at 6:52pm

बहुत बढ़िया प्रेरक रचना आ तेज वीर सिंह जी, बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 21, 2019 at 12:23pm

मुह तरम तेजवीर सिंह साहिब, संदेश प्रद लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं 

Comment by TEJ VEER SINGH on May 20, 2019 at 5:58pm

हार्दिक आभार आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'जी।

Comment by नाथ सोनांचली on May 20, 2019 at 5:41pm

आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। बढ़िया और संदेशपरक लघुकथा लिखी आपने। इस लघुकथा पर ढेरों बधाई आपको।

Comment by TEJ VEER SINGH on May 18, 2019 at 5:58pm

हार्दिक आभार आदरणीय नीता कसार जी।

Comment by Nita Kasar on May 18, 2019 at 4:58pm

माँ की नसीहत ने बच्चे में अच्छे संस्कार ही नहीदिये बल्कि चौधरी को दुविधा में डालकर बौना साबित कर दिया ।संदेशप्रद कथा केलिये बधाई ।आद० तेजवीर सिंह जी ।

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