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ग़ज़ल _(रहबरी उनकी मुझको हासिल है)

(फाइ ला तुन _मफा इलुन _फ़ेलुन)

रहबरी उनकी मुझको हासिल है l
अब भला किसको फिकरे मंज़िल है l

दे सफ़ाई न क़त्ल पर वर्ना
लोग समझेंगे तू ही क़ातिल है l

उस हसीं से गिला है सिर्फ यही
वो वफ़ाओं से मेरी गाफिल है l

दोस्तों से वो राय लेते हैं
सिर्फ़ उलफत में ये ही मुश्किल है l

ढूँढ कर लाए तो कोई ऎसा
मेरा महबूब माहे कामिल है l

जो बचाता है बदनज़र से उन्हें
उनके रुखसार का ही वो तिल है l

वो है तस्दीक धोके बाज़ कोई
जिसके ऊपर फिदा तेरा दिल है l

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 19, 2019 at 9:42pm

आदरणीय तस्दीक अहमद साहिब नमस्कार, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई, बधाई आपको  

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 19, 2019 at 8:41pm

जनाब दिगंबर साहिब , ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 19, 2019 at 8:40pm

जनाब भाई लक्ष्मण धा मी साहिब, ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by दिगंबर नासवा on April 19, 2019 at 8:12pm

तस्दीक अहमद साहब एक लाजवाब ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाई स्वीकारें ... 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 19, 2019 at 7:51pm

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 19, 2019 at 7:08am

जनाब सलीम रज़ा साहिब आ दाब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by SALIM RAZA REWA on April 18, 2019 at 9:41pm
मोहतरम तस्दीक साहब,
उम्दा ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबूल करें l
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 16, 2019 at 5:54pm

मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब , ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 16, 2019 at 5:53pm

मुहतरम जनाब तेज वीर साहिब, ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Samar kabeer on April 16, 2019 at 2:56pm

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

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