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बेटा-बेटी  में  किया, जिसने   कोई  भेद।
उसने मानो कर लिया, स्वयं नाव में छेद।।
स्वयं नाव में छेद, भेद  की  खोदी  खाई।
बहिना से ही दूर, कर दिया उसका भाई।।
कोई  श्रेष्ठ न तुच्छ, लगें  दोनों  ही  प्रेटी।
ईश्वर  का   वरदान,  मानिये   बेटा-बेटी।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
**हरिओम श्रीवास्तव**

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Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on March 17, 2019 at 5:04pm

आद0 हरिओम श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बढिया विषय लेकर बेहतरीन कुण्डलिया लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये। अगर प्रेटी का कोई और विकल्प हो तो और बेहतर होंगा अन्यथा हिंदी का शब्द न होने से हिंदी शब्दकोश में लोग इसका अर्थ खोजते रह जाएंगे। सादर

Comment by Hariom Shrivastava on March 15, 2019 at 9:42am

आदरणीय सौरभ पाण्डे जी,आपकी उपस्थिति व समीक्षात्मक प्रतिक्रिया से प्रयास सफल जान पड़ा। मैं अँग्रेजी के शब्दों के प्रयोग से बचता ही हूँ आदरणीय, किंतु बेटी के तुक के सीमित विकल्प होने के कारण 'प्रेटी' शब्द प्रयुक्त करना पड़ा। उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल से शुक्रिया।।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 14, 2019 at 4:09pm

आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी, आपकी कुण्डलिया गंभीर विषय पर सहज प्रवाह में सीख देती बढ़ती जाती है. प्रेटी का जैसा उपयोग आपने किया है वह चुटीला तो है ही बोलचाल की भाषा की स्वीकार्यता को बढ़ाता हुआ है. हालाँकि, अंघ्रेज़ी के शब्दों के प्रयोग को लेकर कई सदस्य असहज हो उठते हैं. बहरहाल, रचना की प्रवृति ही शब्दों के प्रयोग का ठोस मानक है. 

हार्दिक बधाइयाँ एवं अशेष शुभकामनाएँ 

Comment by Hariom Shrivastava on March 14, 2019 at 10:49am

आदरणीया नीलम उपाध्याय जी,उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आपका  हार्दिक आभार।

Comment by Neelam Upadhyaya on March 14, 2019 at 10:39am

आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी, नमस्कार। अच्छी कुण्डलिया छन्द की प्रस्तुति। बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Hariom Shrivastava on March 13, 2019 at 7:26pm

आदरणीय समर कबीर साहब आपकी उपस्थिति व हौसलाअफजाई हेतु हार्दिक आभार।

Comment by Samar kabeer on March 12, 2019 at 2:35pm

जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छा कुण्डलिया छन्द लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।

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