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अंतिम साँझ .......

लिख लेने दो
एक अंतिम साँझ
मुझे
साँझ के पन्नों पर
अभिलाषाओं की वेदी पर
साँसों की देहरी पर
व्योम के क्षितिज़ पर
स्मृति के बिम्बों पर
मौन की गुहा में
स्पर्शों की गंध पर
श्वासों के आलिंगन में
अन्तस् के दर्पण पर
बिंदु के अस्तित्व में
लिख लेने दो
मुझे
प्राणों में लीन प्राणों की
अंतिम
साआआआं ... झ


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 22

Comment

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Comment by Sushil Sarna on February 12, 2019 at 7:46pm

आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on February 12, 2019 at 7:46pm


आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब। ... सृजन के भावों को अपनी स्नेहाशीष से अलंकृत करने का दिल से शुक्रिया।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2019 at 4:59am

आ. भाई सुशील जी, सुंदर कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on February 7, 2019 at 2:59pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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