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ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )

(१२१२ ११२२ १२१२ २२/११२ )
***
न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी 
वगरना क़ल्ब में मुमकिन है कोई घाव कभी 
***
इमारतें जो बनाते जनाब रिश्तों की 
उन्हें भी चाहिए होता है रखरखाव कभी 
***
हयात का ये सफर एक सा कहाँ होता 
कभी ख़ुशी तो मिले ग़म का भी पड़ाव कभी 
***
न इश्क़ की भी ख़ुमारी सदा रहे यकसाँ 
कभी उतार का आलम है और चढाव कभी 
***
अदब से पेश ज़रा आइये ज़माने से 
कि डाल सकता है मुश्किल में बेज़ा ताव कभी 
***
हयात आपकी ख़तरे में डाल सकता है 
क़रीब आने न दीजै कोई तनाव कभी
***
यक़ीन कीजै बदलना है वक़्त की फ़ितरत 
कभी पुलाव का मौसम तो है अभाव कभी 
***
सभी को बख़्शी बराबर है नैमत-ए-क़ुदरत 
ख़ुदा तो करता नहीं कोई भेदभाव कभी 
***
सलाह मुफ़्त में देना 'तुरंत ' छोड़ें अब 
कि बेवक़ूफ़ को हरगिज़ न दें सुझाव कभी 
***
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी
०८/०१/२०१९

(मौलिक एवं अप्रकाशित) 

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Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on Wednesday

Mahendra Kumar जी ,आपकी स्नेहिल सराहना से अभिभूत हूँ | सादर नमन | 

Comment by Mahendra Kumar on Wednesday

न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी 
वगरना क़ल्ब में मुमकिन है कोई घाव कभी  ...बहुत ख़ूब!

इस बढ़िया ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी. सादर.

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on Wednesday

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी , सदर नमस्कार | आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार | जी बिलकुल आदरणीय Samar kabeer साहेब की इस्लाह निश्चित रूप से मेरे कलाम को बेहतर बनाने में अमूल्य योगदान दे रही है | तदनुसार संसोधन कर दिया है | 

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on Wednesday

आद0 गिरधारी सिंह गहलोत जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल पर दिली मुबारकबाद,, शेष आद0 समर साहब के बातों का संज्ञान लीजियेगा।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on Tuesday

भाई Ajay Tiwari जी 

खाकसार का कलाम पसन्द करने और हौसला आफजाई का बेहद शुक्रिया  |

Comment by Ajay Tiwari on Tuesday

आदरणीय गिरधारी जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है.हार्दिक बधाई.

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on Monday

आदरणीय Ravi Shukla जी ,आदाब ,

खाकसार का कलाम पसन्द करने और हौसला आफजाई का बेहद शुक्रिया जनाब |

 

Comment by Ravi Shukla on Monday

आदरणीय गिरधारी सिंह जी बढ़िया गजल आपने कहीं शेर दर शेर मुबारकबाद पेश करता हूं

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 11, 2019 at 10:32pm

आदरणीय Sameer Kabeer साहेब ,बहुत बढ़िया इस्लाह ,बहुत बहुत आभार | अभी संशोधित करता हूँ | सादर नमन | 

Comment by Samar kabeer on January 10, 2019 at 5:43pm

'क़रीब आने न दीजै कोई तनाव कभी'

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