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३ क्षणिकाएँ ...

छोटी सी बात
साँय-साँय करती रात
स्मृति पटल को दे गई
अमर
स्पर्श
सौग़ात

........................

व्योम
शून्यता के पर्याय के अतिरिक्त
आश्रय स्थल भी है
उन स्मृतियों का
जो जीती हैं
मिट कर भी
अंत से अनंत तक

.....................................

भला घर
खंडहर में
तब्दील कब होते हैं
जब तक

रस मधुरस में एक रचना
 
३ क्षणिकाएँ ...
 
छोटी सी बात
साँय-साँय करती रात
स्मृति पटल को दे गई
अमर
स्पर्श
सौग़ात
 
........................
 
व्योम
शून्यता के पर्याय के अतिरिक्त
आश्रय स्थल भी है
उन स्मृतियों का
जो जीती हैं
मिट कर भी
अंत से अनंत तक
 
.....................................
 
भला घर
खंडहर में
तब्दील कब होते हैं
जब तक
बुज़ुर्ग साथ होते हैं
खंडहर भी
घर होते हैं
 
..............................
 
सुशील सरना

साथ होते हैं
खंडहर भी
घर होते हैं

..............................

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 28

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Comment by Sushil Sarna on December 6, 2018 at 7:55pm

आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह  जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on December 6, 2018 at 7:54pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan  जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on December 6, 2018 at 7:54pm

आदरणीय Samar kabeer जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on December 6, 2018 at 7:54pm

आदरणीय राज़ नवादवी जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on December 6, 2018 at 4:28pm

आदरणीय सुशील सरना जी गजब सुंदर रचना खासकर वह पंक्ति बुजुर्ग साथ होते हैं बहुत ही बेहतरीन है, बहुत बहुत बधाई

Comment by narendrasinh chauhan on December 4, 2018 at 11:40am
भला घर
खंडहर में
तब्दील कब होते हैं
जब तक
बुज़ुर्ग साथ होते हैं
खंडहर भी
घर होते हैं
 आदरणीय सुशील सरना जी खूब सुन्दर रचना 
Comment by Samar kabeer on December 4, 2018 at 11:37am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by राज़ नवादवी on December 4, 2018 at 9:49am

वाह आदरणीय सुशील सरना जी वाह,

भला घर
खंडहर में
तब्दील कब होते हैं
जब तक
बुज़ुर्ग साथ होते हैं
खंडहर भी
घर होते हैं
सुन्दर रचना, बधाई स्वीकार करें. सादर. 

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