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जलूँ  कैसे  तुम्हारे बिन - लक्ष्मण धामी"मुसाफिर" ( गजल )

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२

अकेला हार जाऊँगा, जरा तुम साथ आओ तो
अमा की रात लम्बी है कोई दीपक जलाओ तो।१।


ये बाहर का अँधेरा तो  घड़ी भर के लिए है बस
सघन तम अंतसों में जो उसे आओ मिटाओ तो।२।


कहा बाती  मुझे  लेकिन  जलूँ  कैसे  तुम्हारे बिन
भले माटी, स्वयं को अब चलो दीपक बनाओ तो।३।


गरीबी, भूख,  नफरत, वासनाओं  का मिटेगा तम
इन्हें जड़ से मिटाने को सभी नित कर बटाओ तो।४।


महज दस्तूर को दीपक जलाते इस अमा को सब
बने हर जन जहाँ दीपक  डगर  ऐसी सुझाओ तो।५।


नहीं हो राम तुम तो क्या भरत जैसा ही बन जाओ
सियासत भूलके अपना  वचन  राजा निभाओ तो।६।


महज कहने से क्या होगा वतन का मैं तो सेवक हूँ
स्वयं व्यवहार सेवक  सा  मेरे  हाकिम बनाओ तो।७।

मौलिक-अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

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Comment by Surkhab Bashar on December 25, 2018 at 11:42am

आ.  लक्ष्मण  धामी " मुसाफिर" जी 

बहुत ही अम्दा ग़ज़ल पढ़ने को मिली है

दाद के साथ स्वीकार करें

Comment by Balram Dhakar on December 12, 2018 at 9:57pm

आदरणीय लक्ष्मण जी, सादर अभिवादन।

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल, बधाई स्वीकार करें।

सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 14, 2018 at 7:42am

आ. भाई बृजेश जी, सादर आभार।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 11, 2018 at 11:41am

बहुत ही खूब ग़ज़ल कही है आदरणीय..

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 10, 2018 at 5:44pm

आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन । गजल की सराहना के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 10, 2018 at 5:42pm

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । गजल की प्रशंसा के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 10, 2018 at 5:39pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति , प्रशंसा और मार्ग दर्शन के लिए आभार . 

Comment by Ajay Tiwari on November 8, 2018 at 8:32pm

आदरणीय लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई.

Comment by TEJ VEER SINGH on November 8, 2018 at 6:54pm

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी।बेहतरीन गज़ल।

ये बाहर का अँधेरा तो  घड़ी भर के लिए है बस
सघन तम अंतसों में जो उसे आओ मिटाओ तो।२।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 7, 2018 at 6:30pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति, प्रशंसा, मार्ग दर्शन और दीपोत्सव की शुभकामनाओं के लिए आभार ।

आपको भी दीपोत्सव फूले फले यही कामना है । सादर..

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