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आज फिर अब्बू सुबह सुबह शुरू हो गए थे, “तुझे फौजी ही बनना चाहिए, और कुछ नहीं”. 

दरअसल आज फिर अखबार के पहले पन्ने पर छपा था कि दहशतगर्दों से लड़ाई में कई फौजी शहीद हो गए और उनकी अन्त्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ की जाएगी.
पिछले कई दिन से वह अपने प्ले के रिहर्सल में लगा हुआ था. वर्तमान राजनीति और धर्म के घालमेल के दुष्परिणाम पर आधारित उसका प्ले, जिसे खुद उसी ने लिखा था. और अपने कुछ रंगकर्मी दोस्तों के साथ आने वाले स्वतन्त्रता दिवस पर लोगों के सामने प्रदर्शित करने की पुरजोर कोशिश में दिन रात लगा हुआ था.
“अब्बू, जरूरी नहीं कि लड़ाई सीमा पर और हथियार से ही लड़ी जाये. जो अपने होकर भी देश को खोखला कर रहे हैं, उनका विरोध भी उतना ही जरूरी है”, उसने अब्बू को समझाने की कोशिश की.
अब्बू कुछ देर तक सोचते रहे, कल सड़क पर की घटना उनकी आँखों में तैर गयी. रास्ते में कुछ शोहदे, जो खड़े होकर ठहाके लगा रहे थे, उनको देखते ही बोले “मियाँ, एक झण्डा लेते जाओ, इस बार अपने घर पर जरूर फहरा देना”.
“जरा अपने प्ले को मुझे देना पढ़ने के लिए, संदेश बिलकुल सही होना चाहिए इसका”, अब्बू की आवाज़ पर वह चौंक गया. अपने प्ले की सफलता के लिए उसके मन में अब कोई संशय नहीं था.


मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on Wednesday

बहुत बहुत आभार आ बबीता गुप्ता जी

Comment by babitagupta on Wednesday

आज लड़ाई सरहद से ज्यादा आंतरिक लड़ाई को सुलझाने की हैं.बेहतरीन रचना स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by विनय कुमार on August 10, 2018 at 5:02pm

बहुत बहुत आभार आ मुहतरम जनाब समर कबीर साहब

Comment by विनय कुमार on August 10, 2018 at 5:01pm

बहुत बहुत आभार आ शेख शहज़ाद उस्मानी जी

Comment by विनय कुमार on August 10, 2018 at 5:01pm

बहुत बहुत आभार आ डॉ विजय शंकर जी

Comment by Samar kabeer on August 10, 2018 at 1:48pm

जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 9, 2018 at 6:37pm

समयानुकूल बढ़िया विमर्श के साथ उम्दा बढ़िया सृजन हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार साहिब।

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 9, 2018 at 6:33pm

आदरणीय विनय कुमार जी , बहुत सरल शब्दों में गहरी बात। बहुत अच्छी लघु-कथा बनी , हार्दिक बधाई , सादर।

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