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पास रहते लोग से हम दूर कितने हो गए

2122   2122     2122     212

दूरियां नजदीकियां बन तो गयी हैं आजकल

पास रहते लोग से हम दूर कितने हो गए

 

माँ पिता सारे मरासिम गुम  हुए इस दौर में  

रोटियों के फेर में मजबूर कितने हो गए

 

भूल जाओगे मुझे तुम एक दिन मालूम था

इश्क में मेरे मगर मशहूर कितने हो गए

 

पत्थरों पर सर पटककर फायदा कोई नहीं

उसके दर पर ख्वाब चकनाचूर कितने हो गए

 

रात काली नागिनों सी डस रही है आजकल

हमनशीं थे कल तलक मगरूर कितने हो गए

 

जो चमकते चाँद से रहते सदा ही शादबां

इश्क से चूके तो वे बेनूर कितने हो गए

 

टीन के खाली कनस्तर की तरह थे बज रहे

मिल गयी कुर्सी उन्हें भरपूर कितने हो गए

 

देती है ताक़त सियासत जम्हूरियत में इस कदर 

बन गए नेता तो वे मख्मूर कितने हो गए

 

मुफलिसी में इश्क का नीरज  मज़ा कुछ और है

हाथ खाली भी मिले मसरूर  कितने हो गए

 

था कतल का काम जिनका बस चुनावों से कबल  

जीत कर वो आये हम मश्कूर कितने हो गए 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

 

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Comment by Neeraj Neer on June 29, 2018 at 1:33pm
हार्दिक आभार आप सभी महानुभावों का
Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 29, 2018 at 12:08pm
आदरणीय नीरज जी इस बढ़िया रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर
Comment by रक्षिता सिंह on June 27, 2018 at 1:50pm

आदरणीय नीरज जी

नमस्कार बहुत ही खूबसूरत गजल ...मुबारकबाद कुबूल फरमायें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 26, 2018 at 8:43pm

आ. भाई नीरज जी, अच्छे असआर हुये हैं हार्दिक बधाई।

Comment by Neeraj Neer on June 26, 2018 at 8:37pm

हार्दिक आभार जनाब समर साहब  .... 

Comment by Samar kabeer on June 26, 2018 at 11:20am

आपने जो मिसरा लिखा है वो शिल्प और व्याकरण की दृष्टि से ठीक नहीं'चुनआव' कोई शब्द नहीं है,इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं:-

'क़त्ल करना काम था जिनका हमेशा दोस्तो'

Comment by Neeraj Neer on June 25, 2018 at 10:49pm
जनाब समर साहब उसको इस तरह करने की कोशिश की है
क़त्ल का था काम जिनका क़ब्ल बस चुनआव के
Comment by Samar kabeer on June 25, 2018 at 10:18pm

अब जबकि आपका संदेह दूर हो गया तो,आख़री शैर के ऊला मिसरे को कैसे दुरुस्त करेंगे?

Comment by Neeraj Neer on June 25, 2018 at 8:55pm

आदरणीय सुशिल सरना जी आपका आभार 

Comment by Neeraj Neer on June 25, 2018 at 8:55pm

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी आपका आभार 

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