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गजल- फिर कोई मीठी शरारत हो गई है

मापनी - 2122 2122 2122

 

लोग कहते हैं कि आफत हो गई है

आपसे इतनी मुहब्बत हो गई है

 

नींद मेरी हो न पायी थी मुकम्मल

फिर कोई मीठी शरारत हो गई है

 

ढूँढता हर रोज मिलने का बहाना

आपकी इस दिल को’ आदत हो गई है

 

शुक्रिया है, आप मेरे घर पधारे    

रौशनी में कुछ इजाफत हो गई है

 

सामना जब से किया है मुश्किलों का

और भी मजबूत चाहत हो गई है

 

दिल लिया है या दिया है कुछ भी कहिये

जिन्दगी अब खूबसूरत हो गई है

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

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Comment by Samar kabeer 14 hours ago

'रौशनी में और बर्कत हो गई है'

Comment by Samar kabeer 14 hours ago

जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'ढूँढता हर रोज मिलने का बहाना'

इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है 'हर रोज',इस मिसरे को यूँ कर लें तो ये ऐब निकल जायेगा:-

'ढूँढता है रोज़ मिलने का बहाना'

"शुक्रिया है, आप मेरे घर पधारे

रौशनी में कुछ इज़ाफ़त हो गई है'

इस शैर के ऊला मिसरे में 'है' शब्द भर्ती का है, और सानी मिसरे में 'इज़ाफ़त' क़ाफ़िया सहीह नहीं,'इज़ाफ़त' का अर्थ है निस्बत और एक कलमे को दूसरे से मिलाने के लिए जो ज़ेर (चिन्ह)लगाया जाता है,आपने इस शब्द को बढ़ोतरी के लिए समझा है जबकि बढ़ोतरी के लिए शब्द होता है "इज़ाफ़ा", इस शैर को यूँ कर सकते हैं :-

"शुक्रिया,जो आप मेरे घर पधारे

रौशनी और बर्कत हो गई है'

'दिल लिया है या दिया है कुछ भी कहिये'

इस मिसरे में भी ऐब-ए-तनाफ़ुर हे 'दिल लिया',इस मिसरे को यूँ कर लें तो ये ऐब निकल जायेगा :;

'दिल दिया है या लिया है कुछ भी कहिये'

बाक़ी शुभ शुभ ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा yesterday

आदरणीया  Rakshita Singh जी आपका दिल से शुक्रिया 

Comment by Rakshita Singh on Friday

आदरणीय बसंत जी नमस्कार,
बहुत ही बेहतरीन गजल, मुबारकबाद कुबूल कीजिए ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on Thursday

आदरणीय Mahendra Kumar जी दिल से शुक्रिया आपका 

Comment by Mahendra Kumar on Wednesday

ख़ूबसूरत ग़ज़ल है आदरणीय बसंत जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए इस लाजवाब प्रस्तुति पर. सादर.

Comment by बसंत कुमार शर्मा on Wednesday

दिल से शुक्रिया आदरणीय gumnaam pithoragarhi  जी आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on Wednesday

दिल से शुक्रिया आदरणीय TEJ VEER SINGH  जी आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on Wednesday

दिल से शुक्रिया आदरणीया Neelam Upadhyaya जी आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on Wednesday

दिल से शुक्रिया आदरणीय Shyam Narain Verma जी आपका 

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