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काल चले ऐसी ही चाल |

एक  एक  कर  काटे   डाली  , ठूंठ खड़ा  मन  करे  विचार |
बीत  गए  दिन   हरियाली  के  ,  निर्जन  बना  पेड़ फलदार |
दिन भर  चहल पहल रहती थी ,  जब  होता था    छायादार | 
पास   नहीं   अब    आये  कोई , सूखा   तब   से  है  लाचार |
भरा  रहा जब  फल फूलों  से ,  लोग  आते तब  सुबह शाम |
कोई  खाये   मीठे  फल को  ,  कोई   पौध   लगा   ले दाम  | 
रंग बिरंगे खग आ आ कर ,   गीत   सुना     करते   आराम |  
दूर   दूर से    राही    आकर ,  बैठ   छाया  करते   विश्राम |
आया  रोग  सुखाया    सारा ,  बदल   दिया    ऎसी  हालात |
 सोच सोच   ग़म लगा सताने   , उदासी में  कटे  दिन रात |  
सूख सूख   गिरने लगे   पत्ते ,  पहले की   बदल   गई बात |
जलन  के लिए   लगे काटने ,  जिसकी   आनी  थी  बारात |
ना  जानें  कब  आये  वो दिन  ,फेंक  देंगे  जड़ से निकाल |
 मिटा देंगे जग से जलाकर  ,   फिर   ना   कोई पूछे हाल |
मिट   जायेगीं  सारी   यादें ,    फिर   ना करे कोई मलाल |
सब का   हाल यहीं है वर्मा ,   काल  चले  ऐसी  ही   चाल |
श्याम नारायण वर्मा 
(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Shyam Narain Verma on May 7, 2018 at 12:07pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , उत्साह वर्धन करने के लिए आपका हार्दिक आभार | सादर

Comment by Shyam Narain Verma on May 7, 2018 at 12:04pm

आदरणीय बृजेश कुमार जी , रचना पर प्रतिक्रिया देने के आपका हार्दिक आभार | सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 6, 2018 at 3:52pm

आ. भाई श्यामनारायन जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 6, 2018 at 3:45pm

वाह बहुत सुन्दर और उत्तम सृजन आदरणीय..

Comment by Shyam Narain Verma on May 5, 2018 at 2:48pm
उत्साह वर्धन के लिये आपक आभार । सादर।
Comment by babitagupta on May 5, 2018 at 12:22pm

आदरणीय सरजी,वर्तमान हो रही व्रक्षों की दशा व उनका दुःख खूब्सूर्त शब्दों में व्यान करने के लिए सधन्यवाद.

Comment by Shyam Narain Verma on May 5, 2018 at 11:46am
आपका ह्रदय से आभारी हूँ आदरणीय
Comment by Samar kabeer on May 5, 2018 at 11:28am

जनाब श्याम नारायण वर्मा जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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