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खुद को भी समझाना होगा (गीत)

नये वर्ष में लगता है अब
खुद को भी समझाना होगा

कर जय पराजय की समीक्षा
क्या कमीं क्या क्या प्रबल है
तूने जो खोया या पाया
तेरे कर्मों का ही फल है
पूर्व की उनसब गलतियों को
फिर से ना दुहराना होगा
खुद को भी समझाना होगा।

अपने मन की करता है बस
क्या तूने सोचा है क्षण भर
अनायास ही भाग रहा है
अब यहाँ वहाँ किस ओर किधर
पहले यह निश्चय करना है
तुमको जिस पथ जाना होगा
खुद को भी समझाना होगा।

कर्महीन बस कर मलता है
बिना किए क्या कुछ मिलता है
मंज़िल उनको ही मिलती जो
बिना डरे चलता रहता है
इक ऐसा उद्देश्य बनाओ
खुद को प्रबल बनाना होगा
खुद को भी समझाना होगा।

मौलिक/अप्रकाशित

राम शिरोमणि पाठक

Views: 610

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 3, 2018 at 10:35pm

सुन्दर गीत हुआ आदरणीय..सादर

Comment by ram shiromani pathak on January 3, 2018 at 3:52pm

सुरेंद्र जी उत्साह वर्धन हेतु बहुत आभार आपका

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 3, 2018 at 3:46pm

आ. भाई राम शिरोमणि जी, अच्छा गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।

Comment by नाथ सोनांचली on January 1, 2018 at 2:09pm

आद राम शिरोमणि पाठक जी सादर अभिवादन। बेहतरीन सृजन। नव वर्ष की शुभकामनाओं संग बधाई कुबूल करें। सादर

Comment by ram shiromani pathak on January 1, 2018 at 8:19am

उस्मानी साहब बहुत बहुत आभार आपका।।सादर

Comment by ram shiromani pathak on January 1, 2018 at 8:18am

बहुत बहुत आभार आरिफ़ भाई उत्साह वर्धन हेतु।।सादर

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 1, 2018 at 12:57am

 बहुत बढ़िया मंतव्य, संकल्प और अपेक्षायें शाब्दिक करती बढ़िया भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय राम शिरोमणि जी।

Comment by Mohammed Arif on December 31, 2017 at 7:46pm

आदरणीय राम शिरोमणि जी आदाब,

                       आशा-अपेक्षा  का संचार करती बेहतरीन कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । नववर्ष की शुभकामनाएँ ।

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