For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

1222 1222 122

.
नही हमको जो भाता क्यों करें हम
कोई झूठा बहाना क्यों करें हम

हमीं से रौशनी है चार सू जब
तो बुझने का इरादा क्यूँ करें हम

खमोशी की सदा अक्सर सुनी है
न सुनने का बहाना क्यूँ करें हम

भरोसा जब नहीं खुद पे हमें ही
*वफ़ादारी का दावा क्यूँ करें हम*

हो झगड़ा आपसी सुलझाएँ खुद ही
ज़माने में तमाशा क्यों करें हम

न होता झूठ का कोई ठिकाना
फिर उसको ही तराशा क्यूँ करें हम

मौलिक अप्रकाशित

Views: 694

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on September 23, 2017 at 4:12pm
आदरणीय बृजेश ब्रज भाई जी ,सादर हार्दिक आभार
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on September 22, 2017 at 3:21pm
आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी,हौंसलाफ़ज़ाई के लिए सादर आभार!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on September 22, 2017 at 3:20pm
आदरणीय समर कबीर जी,हौंसलाफ़ज़ाई के लिए तहेदिल शुक्रिया।सादर नमन!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on September 22, 2017 at 3:18pm
आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी ,प्रयास पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए सादर हारदिक आभार। आजकल व्यस्तता अधिक है। इसी वजह से मंच को भी समय नहीं दे पा रहा। यदा कदा समय मिलता है तो ,मंच पर समय दे पाता हूँ। प्रयास रहेगा मंच पर पर्याप्त समय दूँ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 22, 2017 at 3:14pm
वाह वाह आदरणीय बड़ी अच्छी ग़ज़ल हुई..सादर
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on September 22, 2017 at 3:12pm
आदरणीय नीलेश भाई जी,सादर हार्दिक आभार ,जी आपके सुझाव के अनुसार कोशिश करूँगा सादर।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on September 21, 2017 at 9:52pm
आदरणीय सलीम रजा साहब,यत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया! सादर
Comment by नाथ सोनांचली on September 20, 2017 at 1:26pm
आद0 सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर बेहतरीन प्रयास के लिए बधाई कबूल करें। सादर।
Comment by Samar kabeer on September 20, 2017 at 12:10pm
जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on September 20, 2017 at 8:39am
आदरणीय सतविंद्र कुमार जी आदाब, अच्छा प्रयास । बधाई स्वीकार करें । गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
13 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service