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"हिन्दी-दिवस" -अर्पणा शर्मा भोपाल

राजभाषा हिन्दी के दिवस का
अवसर है पधारा,
14 सितम्बर 1949 के दिन
देवनागरी हिन्दी को
हमने अपनी
राजभाषा स्वीकारा,
यही ऐतिहासिक दिन
हिन्दी दिवस नाम से
जाता है पुकारा,
भारत की अनेकों भाषाओं के बीच
हिन्दी का आकर्षण
सबसे न्यारा,
ज्यों विशाल समुद्र में
मिल जातीं
सहस्त्रों जलधारा,
त्यों हिन्दी ने
सब भाषाओं को स्वीकार कर
अपना अस्तित्व सँवारा,
उर्दू, अरबी, संस्कृत,
फारसी, पाली, प्राकृत,
सबसे इसका नाता न्यारा,
विभिन्न भाषा-भाषी
राज्यों को पिरो के एक सूत्र में
संपूर्ण हिन्द में,
जगाती यह भाईचारा,
अनेकता में एकता का
देती यह नारा,
विश्व में हिन्द की अलख जगाये,
प्रसारे हिन्द की गौरव-गाथा,
आओ बढायें हिन्दी का मान,
चहुँ ओर इसका फहरायेँ परचम,
घर, बाहर इसी में सब काम,
हिन्दी में ही वार्तालाप आनंद,
शिक्षा में दिलायें इसे प्रमुख स्थान,
हिन्दी में ही हो तकनीकी ज्ञान,
रोजगार उन्मुख हो
हिन्दी अध्ययन- पाठन,
नई पीढी ले इसका
गंभीर संज्ञान,
हिन्दी का है साहित्य
अनूठा-अपार,
रचयिता इसके
साहित्यकार महान,
इसने हिन्द का इतिहास सँवारा,
संपूर्ण विश्व करता
इसका सम्मान,
अक्षुण्ण रहे इसकी मैलिकता,
सुदृढ हो इसकी वैश्विकता,
रहे सदैव यही प्रयास हमारा,
हिन्दुस्तानियों का ये अभिमान,
हिन्दी से ही हिन्द की शान,
गुँजाये समवेत सब मिल
यह गर्वीला नारा,
"हिन्दी हैं हम वतन हैं,
प्यारा हिन्दुस्तान हमारा "
.
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 469

Comment

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Comment by Mohammed Arif on September 17, 2017 at 11:51pm
आदरणीया अर्पणा शर्मा जी आदाब, हिंदी की गरिमा-गौरव और प्रासंगिकता को रेखांकित करती बेहतरीन रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Samar kabeer on September 17, 2017 at 11:10pm
मोहतरमा अर्पणा शर्मा जी आदाब,हिन्दी दिवस पर अच्छी कविता लिखी,बधाई स्वीकार करें ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 17, 2017 at 10:03pm

अच्छा प्रयास हुआ है आपका आदरणीया अर्पणा जी | हार्दिक बधाई |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 16, 2017 at 5:53pm

हिन्दी दिवस के औचित्य और  इतिहास को कविता का रूप देने की अच्छी कोशिश हुई है

कृपया ध्यान दे...

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