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आभासी इस दुनिया में क्या 

आभास भी आभासी होते हैं ?

शक्ल नहीं होती है सामने 

इंसान भी आभासी होते हैं ?

समय समय पर बनते बिगड़ते 

रिश्ते भी आभासी होते हैं ?

इंसान में इंसानियत नहीं तो  

आभासी इंसान भी होते हैं ?

बदलते युग का आगाज़ है  

असली और नकली भी होते हैं ? 

साहित्य कोष में भी 

कहीं आभासी शब्द होते हैं  ?

जाने कितने ऐसे सवाल है मन में 

यह बेबुनियाद और अभासी होते हैं ?

मौलिक और अप्रकाशित 

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Comment by indravidyavachaspatitiwari on August 17, 2017 at 5:57pm

आभासी को देख कर सामने आना ही होता है अगर नहीं आये तो वह नही आभासी होता है आना होगा सामने यह है उसकी मजबूरी नहीं सहारा उसका दूसरा कोई कही होता है इसलिए आभासी को देखकर मुकरना है मंजूर नही वह कल्पना से है उपजा पर उसे कहना जरूर कहीं

 
Comment by Mohammed Arif on August 17, 2017 at 10:26am
आदरणीय कल्पना भट्ट जी आदाब , आभासी संसार में ही आजकल जी रहे हैं । हमारी जीवन आभासी संसार Virtual world से संचालित हो रहा है । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की बातों का संज्ञाशन लें । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Samar kabeer on August 16, 2017 at 6:45pm
बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,अच्छे प्रश्न उठाये आपने इस कविता में,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
पहली दो पंक्तियों को छोड़कर हर पहली पंक्ति में से 'क्या'शब्द निकाल दें और उसके नीचे वाली पंक्ति के अंत में प्रश्नवाचक चिन्ह लगा दें, ऐसे :-
'शक्ल नहीं होती है सामने
इंसान भी आभासी होते हैं ?

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